यूरोप की वे औरतें जिनकी होती है जबरन नसबंदी [Forced sterilization in Europe] | DW Documentary हिन्दी

Dec 3, 2025Channel
AI Analysis
Data from YouTube Data API v3Updated Just now

Video Overview

Video Details

Published6 months ago
Duration25:56
Video ID-gdAp2s4Wyc
Languagehi
CategoryNews & Politics
PrivacyPublic
Made for KidsNo
Video TypeRegular Video

Performance Metrics

Views7K
Likes285
Comments21
Engagement Rate4.34%
Likes per 100 views4.05
Comments per 1K views2.98

Description

यूरोपीय संघ के 12 देशों में आज भी विकलांग महिलाओं की उनकी सहमति के बिना नसबंदी की जा सकती है. सारा रोचा ख़ुद ऑटिस्टिक हैं और इस प्रैक्टिस को पुर्तगाल में बैन कराने के लिए संघर्ष कर रही हैं. वह पूरे यूरोप में उन लोगों से जुड़ रही हैं, जो इससे प्रभावित हुए हैं, ताकि इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाई जा सके. यूरोप में जबरन नसबंदी जैसी प्रथा अब अतीत की बात होनी चाहिए, क्योंकि यूरोपीय संघ के ज़्यादातर देशों ने इस्तांबुल कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करते समय महिलाओं को हिंसा से बचाने का वादा किया था. फिर भी यूरोपीय संघ के 12 देशों में विकलांग महिलाओं की उनकी सहमति के बिना नसबंदी करना अभी भी वैध है. सारा रोचा इसे बड़ा स्कैंडल मानती हैं. वह कहती हैं कि किसी को भी यह तय करने का हक़ नहीं है कि कोई महिला अच्छी मां बन सकती है या नहीं. सारा पुर्तगाल में इस पर बैन लगाने के लिए अभियान चला रही हैं और पूरे यूरोप में प्रभावित लोगों से जुड़कर जागरूकता फैला रही हैं. उनमें ख़ुद कई तरह की अक्षमताएं हैं और वह प्रेग्नेंट भी हैं, इसलिए यह मुद्दा उनके लिए बहुत निजी है. सारा से बात करने वाली महिलाओं में से एक हैं नताशा ओटेघेम. वह बेल्जियम की रहने वाली हैं. जब वह 24 साल की थीं, तब उनकी उनके मर्ज़ी के ख़िलाफ़ नसबंदी कर दी गई थी. उनकी मां को भरोसा नहीं था कि नताशा अपने बच्चे ख़ुद पाल पाएंगी. अब जाकर नताशा अपने साथ हुए अन्याय को शब्दों में बयां कर पा रही हैं. वह अपना दर्द और ग़ुस्सा ज़ाहिर कर पा रही हैं. बहुत सारी महिलाओं की तरह उनसे भी लंबे समय तक यह कहा गया कि यह सब उनके भले के लिए किया गया है. लेकिन आज नताशा चुप्पी तोड़ रही हैं और बाक़ी पीड़ित महिलाओं के साथ मिलकर अपनी आवाज़ उठा रही हैं. सनी स्टेमलर अपने तीन साल के बेटे माटेओ के साथ बर्लिन में रहती हैं. वह ऐसे ख़ास घर में रहती हैं, जो विकलांग पेरेंट्स के लिए बनाए गए हैं. सनी 34 साल की हैं और उन्हें सीखने में दिक़्क़त होती है. उन्होंने लंबे वक़्त तक इस सोच के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी कि वह अपने बच्चे नहीं पाल सकतीं. आज सनी इस बात की मिसाल हैं कि अगर मदद और सहारा मिले, तो विकलांग लोग भी अच्छे पेरेंट्स बन सकते हैं. #dwdocumentaryहिन्दी #dwहिन्दी #dwdocs #europe #forcedsterilization #women ---------------------------------------------------------------------------------------- अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए. विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: @dwhindi और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G

Related Videos

More videos from DW Documentary हिन्दी