बिहार कब तक देश का लेबर चौराहा बना रहेगा? #video #bihar #india #life #politics #election
Nov 19, 2025•Channel
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Published6 months ago
Duration3:18
Video ID07_dAapjsbk
Languagehi
CategoryMusic
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बिहार चुनाव निपट गया…चुनाव आयोग का प्लान सफल रहा…मन-मुताबिक़ वोट जोड़े और घटाए गए…आदेशानुसार प्रत्याशी जिताए और हराए गए…सारा तमाशा हुआ…लेकिन सबसे जरूरी सवाल जस का तस है…बिहार आख़िर कब तक भारत का लेबर चौराहा बना रहेगा? कब तक बिहार के लोग दूसरे राज्यों में सिर पर बोरी लादकर घूमते रहेंगे? अपने गांव-जवार-पट्टीदारी में सम्मान के लिए लड़ जाने वाले बिहारवासी कब तक दूसरे राज्यों में अलग-अलग वजहों से अपमानित होते रहेंगे?
अरे कब शर्म आएगी नीतीश कुमार को और कब कारखाना लगेगा बिहार में? अस्पतालों के बाहर बिना इलाज कब तो मौतें होंगी? जहरीली शराब पीकर मर जाना कब तक बिहारियों का नसीब रहेगा? रोजगार मांगने पर लाठी मारने का रिवाज कब बंद होगा? है कोई जवाब?
मैं जानती हूँ बिहारवासी कम-पढ़े लिखे हैं…सरकारों की चालाकी नहीं समझते…ग़रीब इतने हैं कि दस-पाँच हज़ार उनके लिए बड़ी रकम होती है…पर उनकी इस बदहाली का ज़िम्मेदार कौन है?
मैं कैसे मान लूँ कि बिहार के लोग ख़ुद बदहाल रहना चाहते हैं? क्या ये सच नहीं है कि बिहार के लोगों को मजदूर बनाये रखने के लिए गहरी साज़िश रची गई?
क्या मुख्यमंत्री सच में इस साज़िश को नहीं समझ पाये? या वो ख़ुद ही साज़िशकर्ता हैं? मैं कैसे मान लूँ कि बिहार के लोगों को मजदूर बनाए रखने का सबसे बड़ा ठेका नीतीश कुमार ने नहीं लिया है? लेबर चौराहे के असली लम्बरदार तो वही हैं!
चुनाव में बाँटने के लिए हज़ारों करोड़ हैं…लेकिन कारखाना लगाने के लिए पैसा नहीं है? काहे मालिक? हज़ारों करोड़ बाँटकर चुनाव लड़ सकते हैं…लेकिन बेरोजगारी दूर करने से डर लगता है?
अरे सच ये है कि अगर बिहार में कारखाने खुल जाएँगे तो बिहार के लोगों को रोजगार मिलने लगेगा…उनका पलायन रुकेगा तो दूसरे राज्यों के कारखानों को सस्ते मज़दूर नहीं मिलेंगे…इससे उत्पादन की लागत बढ़ जाएगी…मुनाफ़ा घट जाएगा…और कम मुनाफा उन्हें मंजूर नहीं है…ज़ाहिर है उन्हें सस्ते मज़दूर तो चाहिए…जिसका ठेका लिया है नीतीश बाबू ने.
ख़ुद सोचिए! उन्होंने पूरे बिहार में शराबबंदी क्यों की? ऐसा तो है नहीं कि बिहार में शराब मिलनी बंद हो गई या शराबबंदी के बड़े-बड़े अभियान चला दिए गए! अवैध शराब भी पकड़ी जाती है और जहरीली शराब से लोग मरते भी रहते हैं…तो फिर काहे की शराबबंदी! ये तो जनता को मूर्ख बनाना हुआ!
लेकिन सरकार कोई कदम हवा में नहीं उठाती…बिहार की शराबबंदी से किसी को तो फ़ायदा हुआ है! सोचिए-सोचिए…सच ये है कि बिहार की शराबबंदी ने पलायन को बढ़ावा दिया है…जिससे दूसरे राज्यों के कारखानों को लेबर की सप्लाई बढ़ी है…उनका मुनाफा बढ़ा है और बिहारवासियों का शोषण बढ़ा है.
अरे जब कारखाने में मजदूरी ही करनी थी तो ये काम तो बिहार में भी हो सकता था न! और घूम फिर कर फिर वही बात कि कारखाने ही नहीं हैं तो काम कैसे मिलेगा! और फिर से मेरा वही सवाल कि अगर चुनावों में बाँटने के लिए हज़ारों करोड़ रूपये हैं तो कारख़ाने क्यों नहीं लगाये गए?
जवाब दीजिए! कब तक बिहार भारत का लेबर चौराहा बना रहेगा? कब तक नीतीश बाबू मजदूरों के ठेकेदार बने रहेंगे?