जेल में गायब हो जाने वाले पोलित्ज़ेक [Politzek: Standing up to the Kremlin] | DW Documentary हिन्दी
Dec 6, 2025•Channel
AI Analysis
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Published6 months ago
Duration1:31:47
Video ID0rcgj0T93WA
Languagehi
CategoryNews & Politics
PrivacyPublic
Made for KidsNo
Video TypeRegular Video
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Description
रूस में राष्ट्रपति पुतिन की आलोचना करना क़ानूनन अपराध बन चुका है. अब तक हज़ारों लोग जेल में डाले जा चुके हैं. ऐसे राजनीतिक क़ैदियों को पोलित्ज़ेक कहा जाता है. यह डॉक्यूमेंट्री इस दमनकारी सिस्टम की गहराई से पड़ताल करती है और पोलित्ज़ेक लोगों को आवाज़ देती है.
आर्सेनी को 2023 में गिरफ़्तार कर लिया गया था और फिर पांच साल का जेल की सज़ा दे दी गई. महज़ 14 साल की उम्र में उसका जुर्म क्या था? उसने अपने क्लासरूम, अपने यूट्यूब चैनल और दोस्तों के साथ बातचीत में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आलोचना की थी. उसके टीचर्स ने रूस की घरेलू ख़ुफ़िया एजेंसी FSB से उसकी शिकायत कर दी.
अब 17 साल का आर्सेनी रूस का सबसे कम उम्र का राजनीतिक क़ैदी है. उसकी मां इरीना उसकी रिहाई के लिए संघर्ष कर रही हैं. उन्हें डर है उनका बेटा शायद जेल से ज़िंदा नहीं निकल पाएगा.
नादियाज़्दा स्कोचिलियेंको ने भी अपनी बेटी साशा की रिहाई के लिए सालों तक संघर्ष किया. जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तब साशा ने एक दुकान में प्रॉडक्ट्स पर ऐसे प्राइस टैग चिपकाए थे, जिन पर युद्ध-विरोधी बातें लिखी थीं. इस पर सेंट पीटर्सबर्ग की एक कोर्ट ने उन्हें सात साल क़ैद की सज़ा सुनाई थी. दो साल तक जेल में रहने के बाद आख़िरकार वह क़ैदियों की अदला-बदली के तहत रिहा हुईं.
इसी तरह रिहा किए गए एक और क़ैदी थे ओलेग ऑर्लॉफ़. वह ‘मेमोरियल’ नाम के NGO के सह-संस्थापक हैं, जिसे 2022 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाज़ा गया था.
यह फ़िल्म उन सभी लोगों की आवाज़ है, जो आज भी रूस की जेलों और पीनल कॉलोनीज़ में बंद हैं.
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