दुविधा बीच पड़ी प्रीत मेरे | मैं देवी माँ से अपने कृष्ण को माँगने गई थी | संगीत वार्ता
Mar 30, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration10:08
Video ID1O6f346-sAA
Languagehi
CategoryFilm & Animation
PrivacyPublic
Made for KidsNo
Video TypeRegular Video
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Description
संगीत अभिव्यक्ति का एक माध्यम है, जो कि भावनाओं और विचारों को स्वर, लय और ताल के साथ प्रस्तुत करके कर्णप्रिय बना देता है। सनातन धर्म में आदि काल से संगीत को अति पवित्र माना गया है। संगीत का प्रयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पूजा, स्तुति, अनुष्ठानों में भी अपने प्रभु की भक्ति में लीन हो जाने के लिए किया जाता रहा है। त्रेतायुग में जहाँ महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण जैसे महाकाव्य की रचना की, तो द्वापर युग में महर्षि वेद व्यास ने श्रीमद्भगवद्गीता जैसे महाकाव्य की रचना की। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में बाँसुरी (मुरली) महत्वपूर्ण हिस्सा थी, उन्हें जब भी ध्यान में लीन होना होता था, तब वह बाँसुरी बजाते थे। किसी भी कथा का संगीत के साथ मंचन होने से उसका प्रभाव मनुष्य के हृदय को छू जा जाता है। इसीलिए जब रामानन्द सागर जी धार्मिक कथाओं पर धारावाहिक का निर्माण प्रारम्भ किया, तो उन्होंने संगीत सम्राट रविन्द्र जैन जी से धारावाहिकों में होने वाले वार्तालाप को भी संगीतबद्ध कराया, जिससे गीतों के साथ वार्तालाप भी स्मरणीय बन गए। दर्शकगण और श्रोतागण आज भी धारावाहिक जय श्री कृष्णा के संगीतमय वार्तालापों को भक्तिभाव से देखते व सुनते है। संगीत वार्ता के माध्यम से आपका प्रिय धार्मिक चैनल 'तिलक' उन्हीं संगीतमय वार्तालापों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसका आनन्द लीजिए और हमारे चैनल से जुड़े रहिए।
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