बेबस करके रेप करने वाले अपराधी, जो हमेशा बच जाते हैं! [Knockout Drops Pt. 2] | DW Documentary हिन्दी
May 15, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration35:47
Video ID3wimVxSwRqE
Languagehi
CategoryNews & Politics
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Description
नॉकआउट ड्रॉप्स: बेरंग, बेस्वाद और बेहद ख़तरनाक. ये दशकों से इस्तेमाल हो रही हैं, जिनसे लोगों को बेहोश करके उन्हें लूटा जाता है, उनका रेप किया जाता है, यहां तक कि उनकी जान भी ले ली जाती है.
‘स्पाइकिंग’ यानी किसी के खाने-पीने में उसकी इजाज़त या जानकारी के बिना कोई नशीली चीज़ मिलाना. इससे पीड़ित पूरी तरह बेबस हो जाता है और अक्सर उसकी याददाश्त भी चली जाती है. इस तरह कई अपराध अनसुने रह जाते हैं. स्पाइकिंग की एक शिकार केट बताती हैं कि उन्हें अगले दिन ये एहसास हुआ, लेकिन हुआ ज़रूर कि पिछली रात उनका रेप किया गया है.
जर्मन संगठन वाइसर रिंग के वकील योहेन लिंक स्पाइकिंग के शिकार लोगों की मदद करते हैं. वो चेताते हैं कि इस समस्या को कम आंका जा रहा है. जबकि पीड़ितों से बार-बार यही सुनने को मिलता है कि उनकी याददाश्त ब्लैकआउट हो जाती है, भले ही उन्होंने उस रात बहुत कम शराब क्यों न पी हो.
नॉकआउट ड्रॉप्स के नाम पर बहुत सारी चीज़ें इस्तेमाल की जाती हैं. पार्टी ड्रग्स से लेकर सिडेटिव्स और नींद की गोलियां तक. कई पीड़ियों को शर्म या डर लगता है कि उनकी बात गंभीरता से नहीं ली जाएगी. ऐसी ही एक शिकार नीना ने रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. उन्हें लगा था कि शुरुआत से ही उनकी बात नहीं मानी जाएगी. यहां तक कि सुबूत मिलने के बाद भी उनका मामला ट्रायल तक नहीं पहुंचा.
किसी के साथ स्पाइकिंग हुई है या नहीं, इसका पता लगाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि नॉकआउट ड्रॉप्स शरीर में बहुत जल्दी विघटित हो जाती हैं. बर्लिन का शारिटे यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल स्पाइकिंग में सबसे ज़्यादा पाए जाने वाले पदार्थों पर शोध कर रहा है.
वहीं इसके सभी पीड़ितों में एक बात कॉमन है. वे सभी ‘नियंत्रण खोने के एहसास’ की बात कहते हैं. एक विशेषज्ञ कहते हैं कि ग़ायब यादों का ख़ालीपन सहना बहुत मुश्किल होता है. ख़ासकर जब पीड़ित ने यौन हिंसा झेली हो. पीड़ितों के वकील लिंक कहते हैं कि सिर्फ़ सख़्त सज़ा नाकाफ़ी है. उनके मुताबिक़ हमें समाज के तौर पर इस पर काम करना होगा. ये सिर्फ़ नेताओं का काम नहीं है. हम सबको मिलकर इससे निपटना होगा.
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