Samvaad: Sarbananda Sonowal, Minister of Ports, Shipping & Waterways | 08 June, 2026
Jun 8, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration25:55
Video ID4fyG4qS94nc
Languagehi
CategoryNews & Politics
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 सालों में भारत ने केवल जमीन और आसमान में ही नहीं... बल्कि समुद्र के रास्ते भी अपनी शक्ति और रणनीतिक पहचान को नई दिशा देने का प्रयास किया है। बंदरगाह से लेकर ब्लू इकॉनमी तक. मत्स्य क्षेत्र से लेकर द्वीपीय विकास तक. और इंडो-पैसिफिक रणनीति से लेकर वैश्विक समुद्री कूटनीति तक. भारत की तटीय सोच में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आज भारत अपनी 7,516 किलोमीटर लंबी तटरेखा को सिर्फ भौगोलिक सीमा नहीं. बल्कि आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, पर्यटन, और राष्ट्रीय सुरक्षा के शक्तिशाली माध्यम के रूप में देखने लगा है। 14,500 किलोमीटर से अधिक संभावित नौगम्य जलमार्ग. 12 बड़े बंदरगाह और 200 से अधिक छोटे और मध्यम बंदरगाह भारत को वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की क्षमता देते हैं। भारत के 9 तटीय राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेश देश की समुद्री अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण रीढ़ हैं। देश की लगभग 18 प्रतिशत आबादी 72 तटीय जिलों में निवास करती है। लेकिन 2014 से पहले भारतीय बंदरगाह की स्थिति कई चुनौती से घिरी हुई थी। जहाजों का औसत टर्नअराउंड टाइम लगभग 96 घंटे तक पहुंच जाता था। यानी एक जहाज को बंदरगाह पर आने से लेकर रवाना होने तक लगभग चार दिन लग जाते थे। देश की लॉजिस्टिक लागत जीडीपी के 13 से 14 प्रतिशत तक पहुंच चुकी थी... जो वैश्विक औसत से काफी अधिक मानी जाती थी। रेल और सड़क कनेक्टिविटी भी पर्याप्त मजबूत नहीं थी। तटीय औद्योगिक क्लस्टर सीमित थे... और मछुआरा समुदाय आधुनिक सुविधा से काफी हद तक वंचित था। आधुनिक मछली पकड़ने वाली नौका. कोल्ड स्टोरेज. प्रोसेसिंग यूनिट. और बाजार तक पहुंच सीमित थी। अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय क्षेत्र में भी आधारभूत विकास और कनेक्टिविटी अपेक्षाकृत धीमी थी। यही वह दौर था... जब भारत को अपनी समुद्री क्षमता को नई दिशा देने की ज़रूरत महसूस होने लगी.
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