गरुण देव का काकभुशुण्डि के सत्संग में जाने से उद्धार हुआ | रामायण | उद्धार कथा
Jun 6, 2026•Channel
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Languagehi
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Description
जिस समय श्रीराम का राज्याभिषेक हो रहा था तब गरुण देव उस समारोह को देखने के लिए नहीं जाते है क्योंकि विश्वास ही नहीं होता है कि श्रीराम स्वयं भगवान विष्णु का अवतार है। वह अपनी शंका का निवारण करने के लिए नारद मुनि के पास जाते है, तो नारद मुनि उनसे कहते है कि लगता है आपको भी अज्ञान और मोह ने भ्रमित कर दिया। यह सुन गरुण देव कहते है कि जब आपने मुझे श्रीराम को नागपाश से मुक्त कराने के लिए भेजा था, तब मैंने उन्हें विवश अवस्था में देखा तो मुझे लगा है कि यह कैसा भगवान जिसे मैंने मुक्त कराया है। नारद मुनि कहते है कि तुम उनकी माया के मोह में आ गए हो, जिससे आज तक कोई नहीं बच सका। तुम्हें अपनी शंका के निवारण के लिए भगवान शिव के पास जाना चाहिए। गरुण देव भगवान शिव के पास जाते है और उनसे कहते है कि जिसकी मुक्ति मेरे द्वारा हुई है वह कैसा भगवान। भगवान शिव कहते है कि प्रभु की माया बड़ी प्रबल है, जिसने तुम्हारे विश्वास को भ्रमित कर दिया है। तुम्हें इस रोग के उपचार के लिए दीर्धकाल तक श्रीराम कथा के सत्संग की आवश्यकता है, अतः तुम सुमेरु पर्वत पर जाकर श्रीराम के परम भक्त काकभुशुण्डि राम कथा द्वारा सुनाई जा रही निरंतर श्रीराम कथा सुनो, जहाँ बड़े-बड़े देवता, गंधर्व, सिद्ध पुरुष, ऋषि, मुनि मानव और पक्षियों के रूप में कथा सुनते मिलेंगे, उनका सत्संग सुनने से तुम्हारा उद्धार हो जाएगा। यह दृश्य देख कर माता पार्वती शिव से प्रश्न करती है, तो शिव जी उन्हें बताते है कि गरुण को अहंकार हो गया था, वह पक्षियों का राजा है, लेकिन कौवा पक्षियों में निहित पक्षी यानि चंडाल पक्षी माना जाता है। जब गरुण एक कौवे के सामने नतमस्तक होकर भक्ति की याचना करेंगे तो उनका अहंकार स्वयं ही नष्ट हो जाएगा। काकभुशुण्डि के पास पहुँचते ही गरुण देव का सारा संदेह और भ्रम मिट जाता है। काकभुशुण्डि गरुण देव से कहते है कि प्रभु जिस पर दयालु हो जाते है, उसे अपनी भक्ति सौंप देते है। गरुण देव कहते है कि मैं इस भक्ति की गंगा में नहाने आया हूँ तथा उन्हें स्वयं के ऊपर लज्जा भी आती है। इस प्रकार गरुण देव का काकभुशुण्डि के सत्संग में जाने से उद्धार हुआ।
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