श्रीराम के हाथों विराध राक्षस को मिली श्राप से मुक्ति | रामायण | उद्धार कथा
Jun 13, 2026•Channel
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Description
ऋषि अत्रि के सुझाव पर दण्डकारण्य स्थित शरभंग ऋषि से मिलने जा रहे श्रीराम लक्ष्मण और सीता जी के साथ एक ऐसे स्थान पर पहुँचते है, जोकि नरभक्षी राक्षसों से भरा हुआ रहता है। दण्डकारण्य की सीमा पर पहुँचने पर विराध नामक एक विशालकाय राक्षस अपनी भूख मिटाने के लिए उनका मार्ग रोक लेता है और जो सीता जी की सुन्दरता पर मोहित जाता है और उन्हें अपना भार्या (पत्नी) बनाना चाहता है। इस उद्देश्य से वह अपने विशाल हाथों से सीता जी को अपनी मुठ्ठी में जकड़ लेता है। विराध सीता जी की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा चलाए जा रहे बाणों को अपने हाथों से पकड़ कर तीली की भांति मसल देता है। लेकिन बाद में बाणों से परेशान होकर वह सीता जी को छोड़ देता है। सीता जी के छूटते ही श्रीराम और लक्ष्मण अपने बाणों के प्रहार से उसकी भुजाओं को अलग कर देते है, जिससे वह धरती पर गिर जाता है। रामायण कथा के अनुसार विराध तुम्बुरु नामक एक गंधर्व था, जिसे कुबेर के श्राप के कारण राक्षस बनना पड़ा था। श्री राम के द्वारा भुजाएं काटे जाने पर वह श्राप से मुक्त हो गया और उसे अपना दिव्य रूप में वापस प्राप्त हो गया।
वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए।
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