शिव भक्त रावण की कथा | गरुड़ राज का अहंकार समाप्त (Shivratri Special) | Ramayan Kunji
Mar 3, 2026•Channel
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Published4 months ago
Duration14:17
Video ID8h6PfgpLd18
Languagehi
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Video TypeRegular Video
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रावण बहुत ही ज्ञानी और शक्तिशाली शिव भक्त था उसने महादेव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर्वत को अपनी भजाओ पर उठा का महादेव को प्रसन्न किया और शिव स्त्रोत का उच्चारण करता रहा। महादेव ने रावण की बकती को परखने के लिए अपने पैर से हिमालय का वजन बढ़ाया तो रावण के हाथ हिमालय के नीचे दब जाते हैं। शिव की उपासना फिर भी रावण बंद नहीं करता और उसकी भक्ति देख महादेव प्रसन्न हो जाते हैं।
गरुड़ राज ने जब श्री राम और लक्ष्मण को मेघनाध के नागपाश से मुक्त किया तो उनके मन में श्री राम को लेकर कुछ प्रश्न उत्पन्न हो जाते हैं। गरुड़ राज को लगता है की जब श्री राम विष्णु जी के अवतार हैं और वो एक नागपाश से मुक्त नहीं हो पाए तो इसका मतलब है की वो शक्तिशाली नहीं हैं और उन्हें मेरी मदद की अवशकता पड़ गयी। गरुड़ राज को लगता है की श्री राम या तो साधारण मनुष्य हैं वो विष्णु जी के अवतार हैं ही नहीं या फिर मैं उनसे अधिक शक्तिशाली हूँ इसी मंशा से जब वो नारद जी से मिलते हैं तो नारद जी उनकी मंशा को दूर नहीं कर पाते तो वो गरुड़ राज को देवों के देव महादेव के पास भेज देते हैं ताकि वो गरुड़ के अहंकार को समाप्त कर उसे ज्ञान दे सके। गरुड़ राज महादेव की शरण में जाते हैं तो महादेव गरुड़ राज को देख कर समझ जाते हैं की गरुड़ राज को अपने ऊपर अभिमान हो गया है और उनके अभिमान को नष्ट करने के लिए वो गरुड़ राज को काकभुशुण्डि के पास भेज देते हैं ताकि पक्षी राज होने के बाद भी उन्हें एक तुच्छ समझे जाने वाले काग से श्री राम की महिमा और ज्ञान मिले और उनका अहंकार समाप्त हो जाए।
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