श्रीकृष्ण ने अक्रूर जी को अपनी सहज भक्ति प्रदान कर किया उद्धार | श्री कृष्ण उद्धार कथा
Jun 6, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration23:39
Video ID8ozPfNJrpdQ
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Video TypeRegular Video
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Description
श्री कृष्ण उद्धार कथा के इस कड़ी में मथुरा के मंत्री अक्रूर जी से जुड़े एक प्रसंग का वर्णन किया जा रहा है। कंस के निमंत्रण पर गोपिकाओं को गोकुल में रोता-बिलखता छोड़ अक्रूर जी और बलराम के साथ रथ पर सवार होकर मथुरा जा रहे श्रीकृष्ण रथ के साथ चल रहे सैनिकों को देख अक्रूर जी से प्रश्न करते है, तो अक्रूर जी उन्हें बताते है कि ये उनके साथी है, जो उनकी सुरक्षा के लिए साथ आए है, क्योंकि कंस की नियत में खोट है, इसलिए हो सकता है कि उसके सैनिक हमें रास्ते में घेर कर मार डाले। इसलिए हमने एक आत्मबलिदानी दस्ते को कई टुकड़ियों में बाँट दिया है। एक टुकड़ी हमारे साथ है, एक टुकड़ी यमुना घाट पर और एक टुकड़ी नदी के उस पार साथ-साथ किनारे चल रही है। हमला होने की स्थिति में हम आपको नदी के पास छिपा कर रखी हुई नावों से उस पार भेज देंगे। श्रीकृष्ण अक्रूर जी की रणनीतिक कौशल की प्रशंसा करते हुए कहते है कि आप मुझे अपने पिता के दिए हुए वचन की झूठा न करने दे, अतः आप हमें महाराज कंस के हवाले कर दीजिए। यह सुन अक्रूर जी कहती है - यदि भाग्य में हजारों यादव वीरों का रक्तपात लिखा है तो ऐसा ही सही। क्योंकि हम चुपचाप खड़े अपने राजकुमार की हत्या का तमाशा नहीं देख सकेंगे। श्रीकृष्ण अक्रूर जी को ढांढ़स बंधाते हुए कहते है कि यदि आप हमारी शक्ति पर विश्वास कर ले तो आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। अक्रूर जी कहते है कि आप हमें अपने कर्म करने में सहायता कीजिए। जिसे सुन श्रीकृष्ण अक्रूर जी को प्रणाम करते हुए कहते है कि हम वचन देते हैं कि आप जो कहेंगे हम वही करेंगे। यमुना नदी के किनारे पहुँचने पर अक्रूर जी श्रीकृष्ण और बलराम को रथ पर छोड़ अपने छिपे हुए साथी सैनिकों को संकेत देने के लिए चार डुबकी लगाने चल देते है। जिसे देख बलराम श्रीकृष्ण से कहते है कि अब आप अपने परम भक्त अक्रूर जी का उद्धार कर दीजिए। अक्रूर जी अपने वस्त्र और मुकुट अपने साथियों को सौंप कर छिपे हुए साथियों को गुप्त संकेत देने के लिए यमुना नदी में पहली डुबकी लगाते है। लेकिन यह क्या अक्रूर जी को बलराम और श्रीकृष्ण नदी के तल में बैठे हुए दिखाई देते है। वह हतप्रभ होकर नदी के बाहर अपना सिर निकालते है, यह क्या बलराम और श्रीकृष्ण तो अपने रथ पर बैठे हुए है। अक्रूर जी पुनः डुबकी लगाते है, लेकिन इस बार नदी के तल पर बैठे श्रीकृष्ण उनसे कई प्रकार के प्रश्न पूछने लगते है, जिन्हें सुन वह चकरा कर पुनः अपना सर नदी के बाहर निकालते है। रथ पर बैठे हुए श्रीकृष्ण उनसे उनकी घबराहट का कारण पूछते है। अक्रूर जी कोई उत्तर दिए बिना पुनः नदी में डुबकी लगा देते है। लेकिन इस बार श्रीकृष्ण उन्हें शेषनाग पर विराजमान स्वरूप विष्णु के रूप में दिखाई देते है, एक-एक करके उन्हें भगवान विष्णु के अवतारों मत्स्यातार, कूर्मावतार, वराह अवतार, नरसिंह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार, राम अवतार की छवि में श्रीकृष्ण दिखाई देते है। अंत में श्रीकृष्ण कहते है कि तुम्हारे हृदय में प्रतिक्षण केवल हमारा ही अखंड ध्यान रहा। यह अवस्था तुम्हें अपने पूर्व जन्मों की तपस्या और गुरु कृपा से प्राप्त हुई है। जिसके फल स्वरूप आज तुम्हें हमारे वो दुर्लभ दर्शन प्राप्त हुए हैं जो कोटि-कि युगों में किसी विरले जीव को ही प्राप्त होते हैं। तुम्हारी अटल राजभक्ति के फल स्वरूप आज हम तुम्हें अपनी सहज भक्ति प्रदान करते हैं। श्रीकृष्ण में विराट स्वरूप के दर्शन प्राप्त कर जब अक्रूर जी बाहर आते है तो उनके साथी उन्हें चौथी डुबकी लगाने के लिए कहते है। यह सुन अक्रूर जी कहते है कि जो सबकी रक्षा करता है, उनकी चिंता करने की हमें कोई आवश्यकता नहीं। वह रथ पर बैठे श्रीकृष्ण से कहते है – प्रभु हमें चिंता नहीं करनी चाहिए, हमें क्षमा कर दो। श्रीकृष्ण कहते है – अक्रूर जी हम तो केवल आपकी चिंता दूर कर रहे थे।
"भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जीवन का उद्देश्य कंस के वध और महाभारत के युद्ध तक सीमित नहीं था, बल्कि अपनी विभिन्न लीलाओं के माध्यम से धर्म, करुणा, प्रेम और न्याय का संदेश प्रदान करना था। अपने भक्तों और मानवता के लिए संकट बनें अधर्मियों का विनाश करके मानव में ईश्वर के प्रति आस्था, श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करना था। उन्होंने सिखाया कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर मानव कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। उनके द्वारा श्रीमद्भागवत के माध्यम से दिए गीता के उपदेश की प्रासंगिकता को अन्य धर्म को मानने वालों ने भी स्वीकार किया। उन्होंने अपने जीवन में अपने भक्तों के साथ शत्रुओं का भी उद्धार किया था। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक उन उद्धार कथाओं संकलित करके आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसका आप भक्ति भाव से आनन्द ले और तिलक से जुड़े रहे। जय श्री कृष्णा
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