क्यों नहीं मिल रहा मुस्लिम महिलाओं को हक | Ashwini Upadhyay | Dil Se Deshi

Nov 25, 2025Channel
AI Analysis
Data from YouTube Data API v3Updated Just now
Dil Se Deshi
Dil Se Deshi

751K subscribers

View Channel

Video Overview

Video Details

Published6 months ago
Duration12:34
Video ID8s41O0-RgPM
Languagehi
CategoryPeople & Blogs
PrivacyPublic
Made for KidsNo
Video TypeRegular Video

Performance Metrics

Views65
Likes8
Comments0
Engagement Rate12.31%
Likes per 100 views12.31
Comments per 1K views0.00

Description

भारत का तिरंगा सिर्फ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं… यह हमारी अस्मिता, हमारी आस्था, हमारी आज़ादी और हमारे गर्व का सबसे पवित्र प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं—1933 में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान ऐसा ऐतिहासिक पल हुआ था, जिसने तिरंगे के सम्मान को हमेशा के लिए अमर कर दिया? उस दिन सुबह 5 बजे तिरंगा सबसे ऊँचे पोल पर फहराया जाना था। एक 18 फुट के काले स्टील पोल पर झंडा चढ़ना था… लेकिन रस्सी उलझ गई। ऊपर का हिस्सा जाम हो गया। नीचे हजारों लोग खड़े थे—नेता, कार्यकर्ता, किसान, छात्र… और खुद पंडित जवाहरलाल नेहरू। पर कोई भी ऊपर चढ़ नहीं सकता था। ये इतना खतरनाक था कि आयोजकों ने मना कर दिया—“किसी की जान खतरे में मत डालो।” लेकिन तभी भीड़ में खड़ा एक युवा आगे आया। राजपूताना का वीर—किशन सिंह राजपूत। उसने कहा— “अगर तिरंगा ऊपर नहीं जाएगा, तो मैं जाऊँगा।” सबने सोचा यह पागलपन है। लेकिन जब कोई राष्ट्रध्वज के सम्मान के लिए खड़ा होता है, तो उसे रोकने की ताकत दुनिया में किसी के पास नहीं होती। किशन सिंह ने नंगे हाथों से 18 फुट ऊँचे पोल पर चढ़ना शुरू किया। लोग सांस रोके देख रहे थे। नीचे पंडित नेहरू खड़े थे— आँखों में चिंता… लेकिन दिल में गर्व। किशन सिंह ऊपर पहुँचा, उलझी रस्सी को खोला, तिरंगे को सीधा किया… और जैसे ही तिरंगा हवा में लहराया— पूरा मैदान “वन्दे मातरम्” से गूँज उठा। नेहरू जी की आँखों में आँसू आ गए। किशन सिंह को मंच पर बुलाया गया। लेकिन उसने कहा— “मैं शाम को आऊँगा… अभी तिरंगा फहरा है, वह सबसे बड़ा सम्मान है।” बाद में डॉक्टर हेडगेवार को भी यह घटना पता चली। उन्होंने इस वीर को सम्मानित करने के लिए चाँदी का छोटा लौटा भेंट किया— एक प्रतीक कि तिरंगे का सम्मान बलिदान, निष्ठा और साहस से जन्म लेता है। लेकिन आज… जब कोई तिरंगा का रंग बदलने की बात करता है, या भगवा, हरा, लाल के नाम पर विवाद खड़ा करता है, तो यह कहानी हमें याद दिलाती है— तिरंगा किसी रंग का विरोध नहीं… तिरंगा पूरे देश की पहचान है। तिरंगे के आगे कोई विवाद नहीं, सिर्फ सम्मान है। इसलिए 15 अगस्त और 26 जनवरी सिर्फ तारीखें नहीं हैं— ये वह दिन हैं जब हर भारतीय अपने तिरंगे के नीचे एकजुट खड़ा होता है। न तिरंगे का कोई धर्म है… न तिरंगे का कोई मत। तिरंगा सिर्फ भारत है— और भारत हम सब हैं। #IndiaReforms #CorruptionFreeIndia #SystemChange #PoliticalReforms #CashlessIndia #SecurityReforms #LawReforms #GoodGovernance #IndianEconomy #UPIIndia

Related Videos

More videos from Dil Se Deshi