महर्षि वाल्मीकि से शिक्षा पाकर लव कुश का हुआ उद्धार | रामायण उद्धार कथा

Jun 27, 2026Channel
AI Analysis
Data from YouTube Data API v3Updated Just now
Ramayan
Ramayan

4.7M subscribers

View Channel

Video Overview

Video Details

Published2 weeks ago
Duration9:30
Video ID9EVW9UzaBUo
Languagehi
CategoryPeople & Blogs
PrivacyPublic
Made for KidsNo
Video TypeRegular Video

Performance Metrics

Views3.9K
Likes51
Comments4
Engagement Rate1.41%
Likes per 100 views1.31
Comments per 1K views1.03

Description

महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में अपने पुत्रों के साथ शरण लिए सीता को जब गुरु माँ से पता चलता है कि गुरुदेव उनके बालकों की बातों से अति प्रसन्न है, इसलिए वह कह रहे थे कि सबसे पहला और सबसे बड़ा गुरु माता ही होती है और उन्होंने हर्ष मुनि को आदेश दिया है कि अब उन दोनों की संगीत की शिक्षा आरंभ करें, इसलिए उन्होंने दो छोटी-छोटी वीणाएं भी मंगाई है। यह सुन सीता कहती है कि यह सब गुरुदेव की प्रेरणा से हो रहा है। अगले दिन महर्षि वाल्मीकि लव-कुश को सातों स्वरों की विशेषताओं को वर्णन करके उपरान्त माता सरस्वती की मंदिर के समक्ष संगीत की शिक्षा देना आरम्भ कर देते है। गुरुदेव संगीत की शिक्षा देने के साथ ही साथ उन्हें मानवता के गुणों, योग, धनुर्विधा की शिक्षा भी प्रदान करते है। जिसका वह दोनों बड़े ही मनोभाव के साथ अभ्यास करते है। उनकी लगन को देखते हुए एक दिन गुरुदेव उन दोनों का उपनयन संस्कार करने निर्णय करते है और सीता से कहते है कि तुमने इन्हें मुझे शिष्य के रूप में समर्पित किया है, अतः अब मैं इनका गुरू पद स्वीकार करते हुए यज्ञोपवीत संस्कार करा कर विधिवत शिक्षा आरम्भ करना चाहता हूँ। यह सुन सीता अति प्रसन्न होते हुए उपनयन संस्कार की तैयारी करती है। यज्ञ और मंत्रोच्चार के मध्य लव-कुश का उपनयन संस्कार किया जाता है। गुरु देव उन दोनों को शिक्षा देना आरम्भ कर देते है, वह उन्हें शिक्षा देने के साथ ही वृक्षों, नदियों, पशुओं आदि के द्वारा मानव पर किए जाने वाले परोपकारों से भी परिचित कराते है। समय के साथ लव-कुश बड़े हो रहे गुरुदेव के द्वारा प्रदान की जा रही शिक्षाओं को आत्मसात कर लेते है। वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए। #shreeram#ramayan #katha #uddharkatha #ramayanuddharkatha

Related Videos

More videos from Ramayan