इंडोनेशिया का ग्रीन इस्लाम: जब प्रकृति धर्म बन जाए [Indonesia's Green Is-lam] DW Documentary हिन्दी
Dec 30, 2025•Channel
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Published5 months ago
Duration28:26
Video ID9cQfe_SHiEo
Languagehi
CategoryNews & Politics
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Description
इंडोनेशिया में अब बड़ी संख्या में इमाम, लोगों से प्रकृति की रक्षा करने, और दुनिया को बचाने की अपील कर रहे हैं. पर्यावरण संरक्षण की यह नई पहल जकार्ता में स्थित, दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक से शुरू हुई. लेकिन इस मुहिम पर कितना भरोसा किया जा सकता है? और यह कितनी प्रभावी है?
लकड़ी काटने के ख़िलाफ़ फ़तवे, पृथ्वी की रक्षा पर दिए जाने वाले ख़ुत्बे, और सोलर पैनल व पानी की रिसाइक्लिंग करने वाली मस्जिदें- इंडोनेशिया में पर्यावरण संरक्षण को एक मज़हबी फ़र्ज़ के रूप में पेश किया जा रहा है. इस रूहानी बदलाव का मॉडल बनी है जकार्ता की इस्तिक़लाल मस्जिद, जो एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद है और जिसे दुनिया के पहले “पर्यावरण-अनुकूल उपासना स्थल” का दर्जा मिला है.
अब योजना यह है कि देश की 8 लाख मस्जिदों में से 70 फ़ीसदी को “ईको मस्जिदों” में बदला जाए. क़ुरान पढ़ाने वाले स्कूलों में भावी इमामों को “हरित ख़ुत्बे” यानी “हरित उपदेश” देने की ट्रेनिंग दी जा रही है. “इस्लामिक ग्रीन आर्मीज़” जावा के पहाड़ों में जाती हैं, टिकाऊ खेती सिखाती हैं और अल्लाह की बनाई सृष्टि की हिफ़ाज़त के लिए सामूहिक दुआ करती हैं. इंडोनेशियाई उलेमा काउंसिल जैसी शीर्ष इस्लामी संस्थाएं पर्यावरण अपराधों के ख़िलाफ़ हरित फ़तवे भी जारी कर रही हैं. उनका लक्ष्य 2060 तक इंडोनेशिया को कार्बन-न्यूट्रल बनाना है.
लेकिन इस मुहिम के आलोचक भी हैं. दुनिया का सबसे बड़ा निकेल उत्पादक होने के साथ-साथ इंडोनेशिया, दुनिया के सबसे बड़े कोयला उत्पादकों से एक है. पर्यावरण संरक्षण में जुटे समूहों का कहना है कि यह नया इस्लामी आंदोलन व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी पर तो बहुत ज़ोर देता है, लेकिन देश के बड़े औद्योगिक प्रदूषकों पर चुप रहता है. कुछ धार्मिक नेता तो विवादित खनन परियोजनाओं में भी शामिल हैं.
दुनिया के बाक़ी हिस्सों की तरह, इंडोनेशिया भी विरोधाभासों और हितों को टकराव से भरा है. इसके बावजूद, ग्रीन इस्लाम मूवमेंट लगातार आगे बढ़ रही है और अपना संदेश फैला रही है.
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