असुरराज भैरव ने वैष्णव से विवाह करने की दी धमकी | जय महालक्ष्मी | दिव्य कथा
Jun 12, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration10:46
Video IDA-GSfyop7tY
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Video TypeRegular Video
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Description
वर्षों की घोर तपस्या से अनेकों सिद्धियाँ प्राप्त करके अपने राजमहल लौटे भैरव को गुरु शुक्राचार्य आशीर्वाद स्वरूप एक दिव्य तलवार भेंट करते हुए कहते है कि आपकी सिद्धियों और असुरों की शक्ति के चिन्ह इस तलवार की परीक्षा की घड़ी आ गई है। इसे स्वीकार कर लीजिए राक्षस राज और समस्त धरती लोक पर अपनी धाक जमाइए। रात्रि में जब भैरव की माँ सुरुचि उसके हाथ में तलवार देखकर कहती है कि तुम भी अपने पिता की तरह युद्ध और आक्रमण की बातें करने लगे हो। उत्तर में भैरव कहता है कि जो काम पिता जी अधूरा छोड़ गए हैं उसे मुझे ही पूरा करना है। उसके विचार जानते ही माँ सुरुचि कहती है कि एक मां अपने इकलौते पुत्र को अपना जीवन युद्ध भूमि पर संकट में डालते हुए नहीं देख सकती। मैंने तो वंश आगे बढ़ाने के लिए तुम्हारा विवाह करने का निर्णय लिया है पुत्र। क्या तुम्हें कोई राजकुमारी सुंदर नहीं लगती? भैरव उत्तर देते हुए कहता है कि मैं वैष्णव से विवाह करना चाहता हूँ, उससे युद्ध को युद्ध नहीं स्वयंवर समझ कर लड़ना चाहता हूँ। मैं अपनी शक्ति और पराक्रम से उसे बंदी बना कर अपने पिता की हत्या का बदला भी लेना चाहता हूँ। सुरुचि कहती है कि युद्ध को भूलकर वैष्णव से विवाह का प्रस्ताव भेज दो। भैरव कहता है कि यह भी ठीक है क्योंकि वैष्णव के मेरे विवाह के प्रस्ताव को ठोकर मार देने से ही मेरे लिए युद्ध का बहाना बन जाएगा। राजा रत्नाकर भैरव के द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पढ़ते ही भड़क जाते है क्योंकि उस प्रस्ताव में लिखा था कि यदि राजकुमारी वैष्णव का हाथ उसके हाथ में नहीं दिया गया तो वो उसे बलपूर्वक उठा ले जाएगा। इस प्रस्ताव को सुनकर रानी विजया भी चिंता में पड़ जाती है और पूछती है कि अब हम भैरव को क्या उत्तर देंगे? उत्तर में रत्नाकर कहते है कि वैष्णव जैसी देवी के लिए भैरव जैसा दानव कभी उपयुक्त नहीं हो सकता। इसलिए हम स्पष्ट रूप से विवाह के लिए मना कर देंगे। अपना प्रस्ताव ठुकराए जाने से भैरव को क्रोध में आकर कहता है कि यदि मैं बारात लेकर नहीं जा सकता तो सेना लेकर घुस जाऊँगा। उसका उग्र रूप देख माता सुरुचि उसे समझाने का प्रयास करती है कि विवाह की नींव पर खून का छिड़काव हुआ हो वो विवाह नहीं स्वाहा है और मैं अपने पुत्र को विनाश के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए नहीं देख सकती।
रामायण और जय श्री कृष्णा धारावाहिक को मिले अपार प्रेम के पश्चात रामानंद सागर जी ने धार्मिक धारावाहिकों की अगली श्रृंखला के रूप में जय महालक्ष्मी धारावाहिक का निर्माण करके महर्षि मार्कण्डेय द्वारा जन कल्याण के लिए सुनाई गई माता महालक्ष्मी की दिव्य कथा को जन मानस के सामने प्रस्तुत किया है। भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जिन्हें धन, सम्पदा और समृद्धि की देवी माना जाता है और उनकी अनुकम्पा से ही मनुष्य का जीवन का संचालन सुचारू रूप से चलता है। “तिलक” चैनल “दिव्य कथाएं” के इस संकलन के माध्यम से माता महा लक्ष्मी से जुड़े कुछ अमूल्य प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसके अवलोकन/श्रवण करने से आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। अतः भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।
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