Shaharyar Poetry | तुम्हारा चेहरा, एक अद्भुत कविता...| Aaj Ki Kavita | Sanjeev Paliwal | Sahitya Tak
Jun 10, 2026•Channel
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Published1 week ago
Duration3:28
Video IDBO41ClWqOC4
Languagehi
CategoryComedy
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Description
अनजाने जंगल की खुशबू
तुम आती हो सामने,
और ठहर जाता है समय।
वह नथ तुम्हारी,
जो हीरे की हो या सोने की,
चमकती है मेरे दिल के आईने में।
जब तुम मुस्कुराती हो,
तो वह छोटी-सी गोलाकार ज्योति,
तुम्हारे चेहरे के चारों ओर,
एक प्रेम-चक्र रच देती है।
हर साँस पर हिलती है,
और मुझे लगता है,
मेरा संसार हिल रहा है,
तुम्हारे एक इशारे पर।
बस वहीं टिकी रहती है मेरी नज़र,
जैसे जीवन का केंद्र वही हो।
और फिर तुम्हारी जुल्फ़,
काले रेशम की तरह,
कंधे से फिसलकर लटकती हुई।
कभी गालों को छूती,
कभी हवा से शरारत करती।
वह आज़ाद है, बेलगाम,
जैसे मेरा इश्क़ तुम्हारे लिए।
जब तुम गर्दन घुमाती हो,
तो वे जुल्फें हवा में लहराती हैं,
और उनकी महक,
किसी अनजाने जंगल की ख़ुशबू,
मेरे भीतर भर जाती है।
उन्हें सँभालना चाहती हो तुम,
पर वे तो बग़ावत करती हैं,
जैसे मेरे दिल के अरमान,
तुम्हारे सौंदर्य को छूने को मचलते हैं।
तुम्हारा चेहरा,
एक अद्भुत कविता,
और ये नथ और जुल्फ़,
उसके सबसे प्यारे छंद।
तुम खड़ी रहती हो, मौन,
पर आँखों में इतनी बातें होती हैं,
कि प्रेम का शोर मच जाता है।
मैं, बस देखता रहता हूँ, तुम्हें,
तुम्हारी नथ को,
और उन उड़ती हुई जुल्फ़ों को,
जिनमें मेरा जीवन,
एक सुंदर सपना बनकर,
हमेशा के लिए उलझ गया है।
- शहरयार
(एक पुराना मौसम लौटा - पुस्तक से)
आज की कविता में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक संजीव पालीवाल से सुनिए शहरयार की बेहतरीन कविता.
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