भगवान विष्णु बने वराह और नरसिंह | धर्म रक्षा की महागाथा | श्री कृष्ण लीला
Jul 9, 2026•Channel
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Published1 week ago
Duration51:40
Video IDBUv3AAzTZe8
Languagehi
CategoryFilm & Animation
PrivacyPublic
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Video TypeRegular Video
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Description
"भगवान विष्णु के वराह और नरसिंह अवतार की कथा धर्म की रक्षा और भक्ति की शक्ति को दर्शाती है। जब दैत्य हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को चुरा कर समुद्र की गहराइयों में छिपा दिया, तब विष्णु ने वराह रूप धारण कर समुद्र में प्रवेश किया और अपने दाँतों पर पृथ्वी को उठाकर पुनः स्थापित किया तथा भीषण युद्ध में हिरण्याक्ष का वध कर दिया। अपने भाई की मृत्यु से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने घोर तपस्या कर ब्रह्मा से ऐसा वरदान प्राप्त किया कि उसे न मनुष्य, न पशु, न दिन, न रात, न अस्त्र और न शस्त्र से मृत्यु हो सके। वरदान पाकर वह अत्याचारी बन गया और सभी को अपनी पूजा करने के लिए मजबूर करने लगा। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु का परम भक्त था। अनेक प्रयासों के बाद भी हिरण्यकश्यप उसे मार नहीं सका, यहाँ तक कि उसकी बहन होलिका भी अग्नि में जल गई पर प्रह्लाद सुरक्षित रहा। अंततः जब हिरण्यकश्यप ने क्रोध में खम्भे पर प्रहार किया, तब विष्णु नरसिंह रूप में प्रकट हुए और संध्या समय अपनी जाँघ पर लिटाकर नाखूनों से उसका वध कर धर्म की रक्षा की।"
अपनी शिक्षा पूर्ण होने पर श्री कृष्ण और बलराम गुरु सांदिपनि से कहते है कि गुरु से मिली शिक्षा के ऋण कभी नहीं उतारा जा सकता है, लेकिन लोक रीति अनुसार उचित गुरु दक्षिणा का आदेश दें। गुरु उनसे कहते है कि उनसे प्राप्त शिक्षा का वे जनकल्याण के लिए अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध करेंगे। लेकिन जब श्री कृष्ण गुरु माँ से उनकी इच्छा पूछते है तो वह कहती है कि उन्हें अपना समुद्र में डूब कर मरा पुत्र पुनर्दत्त चाहिए। श्री कृष्ण गुरु माँ को उनके पुत्र को जीवित लाने का वचन देकर समुद्र के किनारे पहुंच जाते है और समुद्र देव से पुनर्दत्त को वापस करने का अनुरोध करते है। समुद्र देव कहते है कि सम्भवतः पुनर्दत्त को मेरे जल के अंदर रह कर लोगों को भक्षण करने वाला पाञ्चजन्य नामक राक्षस ले गया होगा। श्री कृष्ण और बलराम पाञ्चजन्य समुद्र की तलहटी में सूक्ष्म शरीर करके शंख में विश्राम करता हुआ मिलता है। श्री कृष्ण उसे अग्नि बाण चला कर जागते है, जिसकी गर्मी से व्याकुल होकर वह अपना शरीर विशाल कर लेता है। श्री कृष्ण अपनी तलवार से पाञ्चजन्य के दो टुकड़े कर देते है, लेकिन उसके शरीर के अंदर से पुनर्दत्त की हड्डियां नहीं मिलती है। श्री कृष्ण पाञ्चजन्य के शंख को उठा लेते है और बलराम के साथ यमपुरी के द्वार पर पहुंच कर शंखनाद करते है। जिसकी ध्वनि से भयभीत यमराज स्वयं द्वार पर आते है और क्षमा मांगते हुए श्री कृष्ण के अनुरोध पर पुनर्दत्त की जीवित उनके साथ वापस भेज देते है। आश्रम पहुंच कर श्री कृष्ण पुनर्दत्त को गुरु माँ को सौंपते समय एक मनगढ़ंत कहानी भी सुनाते है। अपने पुत्र को जीवित देख गुरु माँ की आँसू की धारा बहने लगती है। "
श्रीकृष्णा, रामानंद सागर द्वारा निर्देशित एक भारतीय टेलीविजन धारावाहिक है। मूल रूप से इस श्रृंखला का दूरदर्शन पर साप्ताहिक प्रसारण किया जाता था। यह धारावाहिक कृष्ण के जीवन से सम्बंधित कहानियों पर आधारित है। गर्ग संहिता , पद्म पुराण , ब्रह्मवैवर्त पुराण अग्नि पुराण, हरिवंश पुराण , महाभारत , भागवत पुराण , भगवद्गीता आदि पर बना धारावाहिक है सीरियल की पटकथा, स्क्रिप्ट एवं काव्य में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ विष्णु विराट जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे सर्वप्रथम दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित 1993 को किया गया था जो 1996 तक चला, 221 एपिसोड का यह धारावाहिक बाद में दूरदर्शन के डीडी नेशनल पर टेलीकास्ट हुआ, रामायण व महाभारत के बाद इसने टी आर पी के मामले में इसने दोनों धारावाहिकों को पीछे छोड़ दिया था,इसका पुनः जनता की मांग पर प्रसारण कोरोना महामारी 2020 में लॉकडाउन के दौरान रामायण श्रृंखला समाप्त होने के बाद ०३ मई से डीडी नेशनल पर किया जा रहा है, TRP के मामले में २१ वें हफ्ते तक यह सीरियल नम्बर १ पर कायम रहा।
Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar
निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर
Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar
निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर
Chief Asst. Director - Yogee Yogindar
मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर
Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar
सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर
Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar
पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर
Camera - Avinash Satoskar
कैमरा - अविनाश सतोसकर
Music - Ravindra Jain
संगीत - रविंद्र जैन
Lyrics - Ravindra Jain
गीत - रविंद्र जैन
Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil
पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील
Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev
संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव
Cast / पात्र
Sarvadaman D. Banerjee
सर्वदमन डी. बनर्जी
Swapnil Joshi
स्वप्निल जोशी
Ashok Kumar
अशोक कुमार बालकृष्णन
Deepak Deulkar
दीपक डेओलकर
Sanjeev Sharma
संजीव शर्मा
Pinky Parikh
पिंकी पारिख
Reshma Modi
रेशमा मोदी
Shweta Rastogi
श्वेता रस्तोगी
Paulomi Mukherjee
पौलोमी मुखर्जी
Sunil Pandey
सुनील पांडेय
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