श्रीराम ने शत्रुघ्न को भगवान विष्णु का बाण प्रदान कर किया उद्धार | रामायण | उद्धार कथा
Jun 16, 2026•Channel
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Description
मधुरा नगरी के ऋषियों की याचना पर लवणासुर नामक राक्षस का वध करने का कार्य शत्रुघ्न सौंप चुके श्रीराम पूजा कक्ष में एक विशिष्ट बाण की पूजा-अर्चना कर रहे होते है कि तभी उनके बुलावे पर शत्रुघ्न उनसे मिलने के लिए पूजा कक्ष में आते है। शत्रुघ्न को देख श्रीराम उनसे कहते है कि मैंने तुम्हें यह दिव्य और अमोघ बाण देने के लिए बुलाया है। इस दिव्य और अमोघ बाण की रचना पिछले प्रणय काल में भगवान विष्णु ने इसलिए की थी क्योंकि उन्हें दो महाबली दैत्यों – मधु और कैटभ का संहार करना था। वे तीनों लोकों की सृष्टि करना चाहते थे और मधु-कैटभ और अन्य राक्षस उसमें विघ्न उत्पन्न कर रहे थे। अतः भगवान विष्णु ने इसी बाण से उन दोनों को मारा। मधु और कैटभ दो शक्तिशाली असुर (राक्षस) थे, जिनका जन्म भगवान विष्णु के कानों के मैल से हुआ था जब वे योग निद्रा में थे। ये बहुत शक्तिशाली थे, उन्होंने ब्रह्मा जी के पास से वेद चुरा लिए थे। भगवान विष्णु इन दोनों को राक्षसों को मारा था, इसलिए भगवान विष्णु को 'मधुसूदन' और 'कैटभजित्' कहा जाता है। श्रीराम ने अपने छोटे भाई शत्रुघ्न को भगवान विष्णु का बाण देकर उद्धार किया।
वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए।
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