Balraj Sahni की मौत से रुकी फिल्म 'बर्फ पर बने पदचिन्ह' | प्राण किशोर कौल | Rafeeq Masoodi | EP 06
Jun 6, 2026•Channel
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Published2 weeks ago
Duration7:45
Video IDFlQDEmxCuPo
Languagehi
CategoryComedy
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Description
विश्व साहित्य: दास्तान-ए-दुनिया में आज की किताब 'बर्फ पर बने पदचिन्ह' एक बेहद मार्मिक और कालजयी उपन्यास है, जिसे हमारे अपने देश के सबसे खूबसूरत हिस्से कश्मीर की पृष्ठभूमि पर विख्यात लेखक प्राण किशोर कौल ने कश्मीरी भाषा में लिखा है. इस अद्भुत और भावुक कृति का शानदार हिंदी अनुवाद रफ़ीक मसूदी जी ने किया है और इसे साहित्य अकादमी ने प्रकाशित व पुरस्कृत किया है.
यह कहानी कश्मीर की खूबसूरत वादियों, वहाँ के जनजीवन और लोक-संस्कृति की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ बर्फ सिर्फ एक मौसम नहीं बल्कि दिल को चीर देने वाला एक ठंडा, चुभता हुआ एहसास है. लेखक इस उपन्यास के माध्यम से दो समानांतर प्रेम कहानियों और मानवीय त्रासदी के गहरे द्वंद्व को उधेड़ते हैं. पहली कहानी दृढ़ चरवाहे राजवली और उसकी पत्नी रेशमा के गाढ़े, निश्चल प्रेम की है जो अपने जवान बेटे कमरू के पहाड़ों में खो जाने और उसकी मृत्यु के बाद गहरे अवसाद और इनकार के चक्रव्यूह में फंस जाती है. दूसरी कहानी कमरू के दोस्त पीरा और लाली के तड़पते हुए मासूम प्रेम की है, जो सामाजिक चालबाजियों, पारिवारिक विरोध और दो गांवों की दुश्मनी की भेंट चढ़ जाता है.
प्राण किशोर कौल के शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा सफर है जहाँ प्रेम अपने आप में एक त्रासदी बन जाता है और कहानी रास्तों से ज्यादा किरदारों के दिल के भीतर घटती है. यह उपन्यास जटिल मानवीय भावनाओं, माँ-बाप के अटूट जुड़ाव, अपनों को खोने के दर्द और नियति के आगे बेबस इंसानी ज़िद के अनूठे मेल वाली श्रेष्ठ कृति है, जिसका अंत किसी चलचित्र की तरह आँखों के सामने तैर जाता है.
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