यूरोप के पोर्ट में कोकेन माफ़िया की घुसपैठ [The Cocaine Mafia in Europe] | DW Documentary हिन्दी
Dec 8, 2025•Channel
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Published5 months ago
Duration42:26
Video IDH1R_VR70xp0
Languagehi
CategoryNews & Politics
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Description
पोर्ट पर काम करने वाले कुछ लोग अपनी जान जोखिम में डाल कर माफ़िया के लिए काम कर रहे हैं. इंटरनेशनल माफ़िया पोर्ट के अंदर के लोगों की मदद से ही कोकेन वाले कंटेनरों को ढूंढ़कर उनकी तस्करी कर पाते हैं.
पोर्ट पर काम करने वाले कुछ ड्राइवर, लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट, और आईटी वाले लोग अपनी नौकरी करने के अलावा छिपकर माफ़िया के लिए भी काम करते हैं. बिना इन कर्मचारियों की मदद के, इंटरनेशनल माफ़िया दक्षिण अमेरिका से आने वाले हज़ारों कंटेनरों में से कोकेन वाले कंटेनर कभी नहीं ढूंढ पाएंगे और न ही उन्हें वहां से बाहर निकाल पाएंगे. पुलिस और कस्टम वाले ऐसे लोगों को "इन्साइडर (अंदर के लोग)" या "द डोर (दरवाज़ा)" कहते हैं, क्योंकि ये लोग माफ़िया के लिए पोर्ट के दरवाज़े खोलते हैं.
रॉटर्डम और एंटवर्प के बाद, हैम्बर्ग का पोर्ट यूरोप में कोकेन की तस्करी का सबसे बड़ा गढ़ बन गया है. पूरे यूरोप में बड़ी मात्रा में कोकेन पहुंचाया जाता है. पुलिस और कस्टम वाले इसमें से केवल 10 से 20 फ़ीसदी कोकेन ही पकड़ पाते हैं.
अपने इस बड़े धंधे को चलाने के लिए माफ़िया को ऐसे लोगों की मदद लगती है जो पोर्ट को क़रीब से जानते हैं. माफ़िया के इन्हीं काले करनामों को रोकने के लिए, पुलिस, कस्टम और पोर्ट वालों ने मिलकर 2024 में एक पोर्ट सिक्योरिटी सेंटर बनाया है. फ़िल्म में दिखाया गया है कि पुलिस कैसे कुत्तों और एक्स-रे मशीनों की मदद से ट्रक और कंटेनरों की तलाशी लेती है.
फ़िल्म में रॉटर्डम में हुआ एक असली केस भी दिखाया गया है, कि कैसे माफ़िया और पोर्ट के कर्मचारी साथ काम करते हैं. एक कंटेनर शिप इक्वाडोर से आई जिसमें केले के क्रेटों में 600 किलो कोकेन छिपा था. फिर पोर्ट पर उसे निकालने की कोशिश की जाती है और आखिरकार पुलिस मुजरिमों को पकड़ लेती है.
इन मुजरिमों के लिए पैसे का लालच बहुत बड़ा है. कोकेन माफ़िया की मदद करने वाले एक बार में लाखों कमा सकते हैं. लेकिन दिक्कत यह है कि एक बार आप इन गिरोहों के साथ जुड़ गए, तो बाहर निकलना बहुत मुश्किल होता है. और पकड़े जाने पर बहुत भारी सज़ा होती है.
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