श्रीकृष्ण ने लालची ब्राह्मण श्रीधर को भक्ति मार्ग दिखाकर किया कल्याण | श्री कृष्ण उद्धार कथा
Mar 31, 2026•Channel
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Published2 months ago
Duration32:32
Video IDIByyUSPFi4w
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Video TypeRegular Video
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Description
श्री कृष्ण उद्धार कथा के इस कड़ी में बलराम (दाऊ भैया) के जन्म से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है। बात उस समय की है जब कंस में देवकी के छह नवजात पुत्रों का मार चुका था। तब शेषनाग क्षीर सागर को छोड़ भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन की कामना करते है और उनके प्रकट होने पर अपने मन की व्यथा को व्यक्त करते हुए कहते है कि जब त्रेतायुग में आप मेरे बड़े भाई श्रीराम थे और मैं लक्ष्मण। तब मैं मर्यादा के कारण आपको कई बातों से रोक ना सका। यदि मैं बड़ा भाई होता तो मैं आपको वनवास में दुख सहने ना देता। इसलिए आपसे एक प्रार्थना है इस बार मुझे बड़ा भाई बनने का अवसर प्रदान के लिए मुझे माता देवकी के सप्तम गर्भ में जाने की आज्ञा दें। श्री कृष्ण की स्वीकृति और आशीर्वाद मिलते ही शेषनाग एक पुंज का रुप लेकर कारागार में बंद देवकी के गर्भ में समा जाते है। जिससे कारागार में दिव्य प्रकाश फैल जाता है। गर्भ से प्रकाश पुंज को निकलते देख वसुदेव और देवकी समझ जाते है कि सातवें गर्भ में कोई दिव्य बालक है। यह दृश्य देख कंस के सैनिक भी आश्चर्यचकित हो जाते है और वे इसकी सूचना कंस को देते है। कंस को सैनिकों की बातों में विश्वास नहीं होता है और उसे लगता है कि यह विष्णु छल से सातवें गर्भ में आ गया है। कंस देवकी के गर्भ को मारने के लिए अपने विश्वस्त सलाहकार चाणूर को साथ लेकर कारागार में जाता है, लेकिन कारागार में प्रवेश करते ही उसे वहाँ से निकल रहे प्रकाश में साँप ही साँप दिखाई देते है, उसे आँखों के दिखना बंद हो जाता है। भय से काँप उठा कंस सैनिकों को साँपों को ढूंढ कर मारने का आदेश कर अपने महल में आ जाता है। लेकिन कंस की मनोस्थिति बिगड़ जाती है, रात्रि में उसे अपने शयन कक्ष में भी हर तरफ साँप दिखाई देने लगते है। वही दूसरी ओर भगवान श्री कृष्ण महामाया का आह्वान करके उन्हें देवकी के गर्भ में स्थित शेष को निकाल कर गोकुल में नंद बाबा के घर पर गुप्त रूप से निवास कर रही वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थापित करने का आदेश देते है और साथ ही उन्हें बताते है कि गर्भ से खींचे जाने का शेष को संकर्षण तथा बलवानों में श्रेष्ठ होने के कारण बलराम कहलाएंगे। महामाया श्रीकृष्ण के आदेश पर देवकी के गर्भ को निकाल लेती है। देवकी को लगता है कि उसका गर्भपात हो गया है, जिससे वह दुखी हो जाती है। जब यह सूचना कंस को मिलती है तो उसे लगता है कि यह भी विष्णु का कोई छल है। वही दूसरी ओर महामाया उस गर्भ को रोहिणी के उदर में स्थापित कर नंदबाबा की पत्नी यशोदा को दर्शन देते हुए इस गूढ़ रहस्य के बारे में विस्तार से बताती है और साथ निःसंतान यशोदा को अपनी गोद भरने के लिए गुरु शांडिल्य से यज्ञ करवाने का सुझाव देती है। यशोदा इस चमत्कार के बारे में नंदबाबा को बताने के बाद अपने उदर से निकल रहे प्रकाश से चिंतित रोहिणी को भी बताती है। एक साध्वी के रूप में गोकुल में छिप कर रह रही रोहिणी की चिंताओं का समाधान कराने के लिए वसुदेव उन्हें अपने कुलगुरु शांडिल्य के पास में ले जाते है। गुरु शांडिल्य अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर बताते है कि यशोदा की गोद शीघ्र ही भरने वाली है। रोहिणी के विषय में बताने के लिए वह वृषिणी वंश की रानी रोहिणी के कुलगुरु महर्षि गर्ग का ध्यान करते है। महर्षि गर्ग उनसे बताते है कि अब जो होने जा रहा है वह विधाता के विधाता की इच्छा पर निर्भर है, उसे कोई नहीं जान सकता। लेकिन इस समय दिव्य लोकों में चर्चा अवश्य है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरित होने का समय आ गया है। मैं यह भी जान गया हूँ कि देवकी के सातवें गर्भ का संकर्षण करके जिन्हें अब रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया गया है, वो तो वो स्वयं भगवान शेषनाग है। जो देवकी के अष्टम गर्भ से प्रकट होने वाले तारणहार की असुरों के विनाश में सहायता करेगा। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने शेषनाग को अपने बड़े भाई का स्थान देकर उद्धार किया।
"भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जीवन का उद्देश्य कंस के वध और महाभारत के युद्ध तक सीमित नहीं था, बल्कि अपनी विभिन्न लीलाओं के माध्यम से धर्म, करुणा, प्रेम और न्याय का संदेश प्रदान करना था। अपने भक्तों और मानवता के लिए संकट बनें अधर्मियों का विनाश करके मानव में ईश्वर के प्रति आस्था, श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करना था। उन्होंने सिखाया कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर मानव कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। उनके द्वारा श्रीमद्भागवत के माध्यम से दिए गीता के उपदेश की प्रासंगिकता को अन्य धर्म को मानने वालों ने भी स्वीकार किया। उन्होंने अपने जीवन में अपने भक्तों के साथ शत्रुओं का भी उद्धार किया था। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक उन उद्धार कथाओं संकलित करके आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसका आप भक्ति भाव से आनन्द ले और तिलक से जुड़े रहे। जय श्री कृष्णा
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