सत्या को अंगीरा ऋषि से मिले श्राप और उसके आशीर्वाद में बदलने की कथा | उद्धार कथा | जय गंगा मैया

Jun 6, 2026Channel
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Published1 month ago
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Video IDJhDo2sKuUWg
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Description

हिरण्यकश्यप की पत्नी विष्णु भक्त नाग कन्या क्याधु के बारे देवी गंगा और देवी उमा आपस में बातें कर रही थी। देवी उमा का मानना था कि क्याधु विष्णु विरोधी हिरण्यकश्यप के अत्याचार के डर से अपनी सारी भक्ति भूल जाएगी। उनके इन विचारों को सुन देवी गंगा कहती है कि क्याधु सदा से ही प्रभु की बड़ी भक्त है। वह पूर्व जन्म में प्रभु की आठ प्रमुख सेविकाओं में से एक विशेष सेविका के साथ-साथ उनके द्वार की प्रहरी सत्या थी। यह सुन देवी उमा प्रश्न करती है कि प्रभु की विशेष सेविका को आज विष्णु विरोधी हिरण्यकश्यप की अर्धांगिनी क्यों बनाना पड़ा। देवी गंगा कहती है कि यह एक श्राप और फिर श्राप को आशीर्वाद में बदलने की कथा है। भगवान विष्णु तक पहुंचने के लिए विष्णु लोक के नौ द्वारों और तेजस्वी प्रकाश के आठ चक्रों से होकर गुजरना पड़ता है। एक दिन जब अंगीरा ऋषि भगवान विष्णु के दर्शन के लिए आए थे, तब द्वार की प्रहरी सत्या अर्थात आज की क्याधु ने ऋषि के बारे में जानते हुए भी प्रभु के दर्शन करने उन्हें इसलिए रोक दिया था क्योंकि उस समय प्रभु विश्राम कर रहे थे। क्याधु के इस दुस्साहस से क्रोधित होकर ऋषि अंगीरा उसे दंड स्वरूप विष्णु लोक छोड़ नाग लोक में जन्म देने का श्राप दे देते है। उस सारे घटनाक्रम के देख रहे नारद मुनि ऋषि अंगीरा से कहते है कि आपने सत्या के साथ अन्याय किया है और आपने क्रोध में आकर श्राप तो दे दिया परंतु आप ये भूल गए कि विष्णु लोक में श्राप नहीं दिया जाता है। यह सुन ऋषि को अपनी भूल का आभास होता है और वह कहते है कि अब क्या हो सकता है, श्राप एक बार देने के बाद वापस नहीं लिया जा सकता। नारद मुनि कहते है कि आप चाहे तो इस श्राप को आशीर्वाद का रूप भी दे सकते हैं। ऋषि अंगीरा अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर कहते है कि असल में यह श्राप प्रभु की इच्छा से ही दिया गया है। सत्या अगले जन्म में नाग कन्या होकर भगवान विष्णु के परम शत्रु हिरण्यकश्यप की पत्नी बनेगी और उनके परम भक्त प्रह्लाद को जन्म देगी। क्याधु को कथा को सुना रही देवी गंगा अंत में कहती है कि अब वह श्राप आशीर्वाद में बदलने वाला है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ स्वरूपा पतित पावनी गंगा का अवतरण स्वर्ग से पृथ्वी पर मानव कल्याण के लिए हुआ था, उनके तटों पर अनेक तीर्थस्थल, नगर बसे हैं, जहाँ श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। गंगा जल के आचमन मात्र ही हृदय को पवित्रता और भक्ति से भर जाता है, इसलिए उन्हें पतितों का उद्धार करने वाली माँ कहा जाता है। उन्हें स्वर्ग से पृथ्वी तक लाने के लिए ऋषि-मुनियों और अनेक राजाओं ने घोर तपस्या की, अनके बाधाएं उत्पन्न हुई और अंत में राजा भगीरथ के प्रयासों से माँ गंगा ब्रह्मा जी के कमण्डल से निकल कर पृथ्वी पर अवतरित हुई। अवतरण की इस प्रकिया में गंगा मैया ने अपने भक्तों और शत्रुओं का उद्धार भी किया इसी उद्धार कथाओं को आपका प्रिय चैनल ‘तिलक’ प्रस्तुत कर रहा है, जिनका भक्ति भाव से आनन्द लीजिए और चैनल से जुड़े रहिए। गंगा मैया आप सभी का कल्याण करें! जय गंगा मैया! #tilak #jaigangamaiya #gangamaiya #uddharkatha #katha #ramanandsagar #ramanandsagarkatha #jaigangamaiyakatha

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