हिज़्बुल्लाह बेनक़ाब: ड्रग ट्रैफ़िकिंग और आतंकवाद (1/3) | DW Documentary हिन्दी
Mar 26, 2026•Channel
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Published3 months ago
Duration52:01
Video IDKHUFeM9Th8s
Languagehi
CategoryNews & Politics
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2008 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने "प्रोजेक्ट कैसेंड्रा" लॉन्च किया. इसका उद्देश्य यह पता करना था कि हिज़बुल्लाह अपनी सैन्य और आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने के लिए किस तरह से ड्रग ट्रैफ़िकिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का इस्तेमाल करता है. तीन भाग की श्रृंखला इसी योजना की कहानी बताती है.
2008 तक, अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन ने यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत इकट्ठा कर लिए थे कि हिज़बुल्लाह एक सैन्य और राजनीतिक संगठन से एक अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट में बदल गया है. वो नशीली दवाओं और हथियारों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और दूसरी आपराधिक गतिविधियों से अरबों कमा रहा था. "प्रोजेक्ट कैसेंड्रा" उन्हें रोकने के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी, टॉप ख़ुफ़िया योजना थी.
4 अगस्त 2020 को बंदरगाह में रखे सैकड़ों टन अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट से बेरूत शहर तबाह हो गया था. सभी की निगाहें ईरान से जुड़ी शिया पार्टी और मिलिशिया हिजबुल्लाह पर टिक गईं, जो लेबनान के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करती है. नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों के दबाव के बावजूद, हिज़्बुल्लाह (शाब्दिक रूप से: "पार्टी ऑफ गॉड") ने विस्फोट के कारणों की किसी भी स्वतंत्र जांच की अनुमति देने से इनकार कर दिया.
हिज़बुल्लाह 1982 में इस्राएली कब्जे के खिलाफ एक प्रतिरोध संगठन के रूप में उभरा. तब भी ईरान ने इसका समर्थन किया था. 40 वर्षों से, इसके लड़ाकों ने लेबनानी राज्य के सभी क्षेत्रों में घुसपैठ की है और देश की प्रमुख ताकत बन गए हैं.
हालाँकि, 2000 के दशक के मध्य में, अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी (डीईए) के मुट्ठी भर पुलिस अधिकारियों ने हिज़्बुल्लाह को गिराने का प्रयास किया. वे अत्यंत गोपनीयता से कार्य करते थे. उनके ऑपरेशन का कोड नाम था कैसेंड्रा. उनकी जाँच संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के अभी भी सुलग रहे खंडहरों में शुरू हुई थी.
तीन भाग की सिरीज में डीईए एजेंटों और इसमें शामिल अन्य लोगों की गवाही के आधार पर "प्रोजेक्ट कैसेंड्रा" की कहानी कही गई है. यह हिज़्बुल्लाह के उदय की कहानी भी बताती है और जटिल भू-राजनीतिक संदर्भों की एक झलक देती है.
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