जून की दोपहरी में इस तपती छत के नीचे... Shiv Kumar Parag | संग्रह 'एक शोर है मेरे भीतर' | EP 1512

Jun 12, 2026Channel
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Published1 week ago
Duration9:18
Video IDMF4b1Vy1f5s
Languagehi
CategoryComedy
PrivacyPublic
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Description

एक सनसनी है हवाओं में, एक हलचल है पानी में, और बर्फ़ की तहें टूट रही हैं। खुली धुप है, घात मगन हैं, झठलाती, लहराती नदियां। लय बांधकर उड़ान भर्ती चिड़ियों की कतारें और उनके कंठ से झरता है स्वतंत्रा का उल्लास। बीत गयी है काली रात और ज्योति-स्नान कर रहे हैं पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, नदी-पर्वत सब। झूम उठे हैं वन-उपवन हुलसे खेतों को निरख रहे हैं किसान और मचल रहे हैं उनके अरमान। दमक रहे हैं चेहरे मजूरों के, जवानों के। मंजिल की ओर बड़ रहे हैं कदम।" टूट गयी हैं जंजीरें, ढह गये हैं यातनाओं के दुर्ग निश्चिंत हैं नागरिक, बढ़ गयी हैं घर-गृहस्थी की मिठास। एक सनसनी है हवाओं में, एक हलचल है पानी में, और बर्फ़ की तहें टूट रही हैं। कितना अच्छा हैं यह दृश्य! कब सच होगा यह सपना!! यह कविता शिव कुमार पराग के कविता-संग्रह ‘एक शोर है मेरे भीतर’ से ली गई है, जिसमें प्रकृति, मनुष्य और समाज के भीतर चल रहे बदलाव की गहरी अनुभूति व्यक्त होती है. इस रचना में हवाओं की सनसनी, पानी की हलचल और टूटती बर्फ की परतों के माध्यम से एक नए समय के आगमन का संकेत मिलता है. अंधकार के बीतने और उजाले के फैलने के साथ कवि एक ऐसे संसार की कल्पना करता है जहां स्वतंत्रता, आशा और मानवीय संवेदनाएं फिर से जीवंत हो उठती हैं. किसान, मजदूर और आम जन के चेहरों पर लौटती चमक इस बदलाव की उम्मीद को और सशक्त बनाती है. यह कविता केवल एक दृश्य-चित्रण नहीं, बल्कि एक बेहतर, न्यायपूर्ण और संवेदनशील समाज के सपने को अभिव्यक्त करती है, जो पाठक को सोचने और उम्मीद करने के लिए प्रेरित करती है. *** आज की किताब - 'एक शोर है मेरे भीतर' रचनाकार - शिव कुमार पराग विधा - कविता भाषा - हिंदी प्रकाशक - सर्व भाषा ट्रस्ट पृष्ठ संख्या - 200 मूल्य - ₹399 साहित्य तक के कार्यक्रम ‘बुक कैफे’ के अंतर्गत ‘एक दिन एक किताब’ में वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय से सुनिए इस महत्वपूर्ण पुस्तक पर रोचक चर्चा. #ekshorhaimerebhitar #shivkumarparag #kavita #hindikavita #hindipoetry #poetrycommunity #poetry #hindikavya #poetry #bookcafe #bookcafeonsahityatak #jaiprakashpandey #sahityatak About the Channel Sahitya Tak आपके पास शब्दों की दुनिया की हर धड़कन के साथ I शब्द जब बनता है साहित्य I वाक्य करते हैं सरगोशियां I जब बन जाती हैं किताबें, रच जाती हैं कविताएं, कहानियां, व्यंग्य, निबंध, लेख, किस्से व उपन्यास I Sahitya Tak अपने दर्शकों के लिये लेकर आ रहा साहित्य के क्षेत्र की हर हलचल I सूरदास, कबीर, तुलसी, भारतेंदु, प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी से लेकर आज तक सृजित हर उस शब्द की खबर, हर उस सृजन का लेखा, जिससे बन रहा हमारा साहित्य, गढ़ा जा रहा इतिहास, बन रहा हमारा वर्तमान व समाज I साहित्य, सृजन, शब्द, साहित्यकार व साहित्यिक हलचलों से लबरेज दिलचस्प चैनल Sahitya Tak. तुरंत सब्स्क्राइब करें व सुनें दादी मां के किस्से कहानियां ही नहीं, आज के किस्सागो की कहानियां, कविताएं, शेरो-शायरी, ग़ज़ल, कव्वाली, और भी बहुत कुछ I Sahitya Tak - Welcome to the rich world of Hindi Literature. From books to stories to poetry, essays, novels and more, Sahitya Tak is a melting pot where you will keep abreast of what's the latest in the field of literature. We also delve into our history and culture as we explore literary gems of yesteryears from Surdas, Kabir, Tulsi, Bhartendu, Premchand, Prasad, Nirala, Dinkar, Mahadevi, etc. To know more about how literature shapes our society and reflects our culture subscribe to Sahitya Tak for enriching stories, poems, shayari, ghazals, kawali and much more. Subscribe Sahitya Tak now. ............................ Links: Facebook: https://www.facebook.com/sahityatakofficial Instagram: https://www.instagram.com/sahityatak/ Twitter: https://twitter.com/sahitya_tak

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