देवी कपाल हस्ता ने किया असुर प्राण हंता का किया अंत | उद्धार कथा | जय गंगा मैया
May 16, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration6:04
Video IDNnNQATkcuMs
Languagehi
CategoryFilm & Animation
PrivacyPublic
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Video TypeRegular Video
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Description
विशाल सेना के साथ अपनी ओर बढ़ रहे अंधकासुर को देख देवी उमा की कपाल हस्ता को आदेश देती है कि वह अंधकासुर और उसकी विनाशकारी शक्तियों को नष्ट कर दे। देवी उमा से विजयी भव का आशीर्वाद लेकर कपाल हस्ता अंधकासुर और उसकी सेना को समाप्त करने के लिए चल देती है। वही अपनी ओर कपाल हस्ता को आता देख अंधकासुर आश्चर्य में पड़ जाता है और कहता है कि देवियों को युद्ध में अपनी शोभा नष्ट करना चाहती हो? युद्ध करना बलवानों का कार्य है। हथियार हाथ में लेने मात्र से कोई योद्धा नहीं बन जाता। कपाल हस्ता कहती है कि अरे मूर्ख असुर तुम में जो शक्ति है हमारी ही है, हमसे ही शक्ति पाकर हमें ही आंखें दिखाते हो। अंधकासुर कहता है कि स्त्रियों को देखकर मुझे क्रोध नहीं आता और जब तुम पर क्रोध नहीं आता तो मैं तुमसे युद्ध कैसे करूं? युद्ध समान स्तर के लोगों में होता है। जाओ देवियों स्वयं अपने आप पर दया करो। स्त्रियों के लिए ऐसे शब्दों को सुनकर कपाल हस्ता को क्रोध आ जाती है और वह अपने त्रिशूल के प्रहार अंधकासुर की सेना को समाप्त करने लगती है। यह देख सेनापति प्राण हंता अंधकासुर से कहता है कि असुरेश्वर इन देवियों को कम समझकर हम भयंकर भूल कर रहे हैं। इन्होंने ही तो हमारे महाशक्तिमान विषासुर, शिर्शासुर और कबंध का वध किया है। यह सुन कर क्रोधित अंधकासुर अपनी सेना को कपाल हस्ता पर आक्रमण करने का आदेश देता है। सेना कपाल हस्ता पर आक्रमण करने के लिए आगे बढ़ने लगती है। लेकिन इस बार कपाल हस्ता पहले अंधकासुर की सेना को अपने मुख से खाने लगती है और बाद बची हुई सेना को मुख से निकली अग्नि से समाप्त करने लगती है। यह देख प्राण हंता अंधकासुर के आदेश पर कपाल हस्ता पर अपने शस्त्र से प्रहार करता है। परंतु कपाल हस्ता अपने त्रिशूल के प्रहार से प्राण हंता के प्राण हर लेती है। अपनी सेना और प्राण हंता का अंत हो जाने से अंधकासुर कपाल हस्ता से कहता है कि कपट की देवी तूने मेरे सारे असुरों को मार दिया परंतु तुझे ये विजय बहुत महंगी पड़ेगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ स्वरूपा पतित पावनी गंगा का अवतरण स्वर्ग से पृथ्वी पर मानव कल्याण के लिए हुआ था, उनके तटों पर अनेक तीर्थस्थल, नगर बसे हैं, जहाँ श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। गंगा जल के आचमन मात्र ही हृदय को पवित्रता और भक्ति से भर जाता है, इसलिए उन्हें पतितों का उद्धार करने वाली माँ कहा जाता है। उन्हें स्वर्ग से पृथ्वी तक लाने के लिए ऋषि-मुनियों और अनेक राजाओं ने घोर तपस्या की, अनके बाधाएं उत्पन्न हुई और अंत में राजा भगीरथ के प्रयासों से माँ गंगा ब्रह्मा जी के कमण्डल से निकल कर पृथ्वी पर अवतरित हुई। अवतरण की इस प्रकिया में गंगा मैया ने अपने भक्तों और शत्रुओं का उद्धार भी किया इसी उद्धार कथाओं को आपका प्रिय चैनल ‘तिलक’ प्रस्तुत कर रहा है, जिनका भक्ति भाव से आनन्द लीजिए और चैनल से जुड़े रहिए। गंगा मैया आप सभी का कल्याण करें! जय गंगा मैया!
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