मर्यादा पुरुषोत्तम राम की अद्भुत कथा का पूरा रहस्य | रामायण कुंजी
Apr 4, 2026•Channel
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Published3 months ago
Duration1:39:35
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श्री राम जी के जीवन पर आधारित रामायण के कुछ ऐसे क्षण जो हर मनुष्य को अपने जीवन में अपनाने चाहिए। श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहा जाता है इस कथा में आपको यही दिखने की कोशिश की गयी है। श्री राम ने कैसे परशुराम के क्रोध को शांत किया और उनके अहंकार को भी तोड़ा। श्री राम को वनवास मिला जिसे उन्होंने हंसी ख़ुशी माता पिता का आदेश समझ कर स्वीकार कर लिए लेकिन लक्ष्मण को क्रोध आया तो उसे भी शांत किया। वनवास में जाते वात प्रजा ने श्री राम के साथ अन्याय की बात कर राजा दशरथ को कोसा तो श्री राम ने प्रजा को भी समझाया की पिता और राजा दशरथ का आदेश प्रजा को भी मानना चाहिए। निषाद राज को अपने से दूर भेज अपने पिता का साथ निभाने के लिए कहा और निषाद राज को अपना मित्र बना कर ऊँच - नीच को दूर रखने का उपदेश भी दिया। जब भरत अपने भाई को वापस अयोध्या लाने के लिए आया तो श्री राम ने अपने कर्तव्य को पूर्ण करने का प्रण भरत को याद दिलाया और उसे राज पाठ सम्भालने का आदेश भी दिया। वन में श्री राम ने बहुत से ऋषि मणियों से ज्ञान भी पाया और माता सीता को खोजने के लिए सुग्रीव की मदद कर उसे अपना मित्र भी बनाया।
श्री राम जी के जीवन पर आधारित रामायण के कुछ ऐसे क्षण जो हर मनुष्य को अपने जीवन में अपनाने चाहिए। श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहा जाता है इस कथा में आपको यही दिखने की कोशिश की गयी है। श्री राम विभीषण की रक्षा के लिए अपने प्राण तक दांव पर लगा देते हैं जिसे देख विभीषण भावुक हो जाता है तो श्री राम कहते हैं की सूर्यवंशी अपनी शरण में आए शरणार्थी की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़े तो प्राण भी दे सकते हैं। रावण के वध के बाद श्री राम लंका को जितने के बाद भी उस पर अपना अधिकार नहीं रखते और विभीषण को राजा बनाकर सीता जी को साथ लेकर अयोध्या लौटने की बात करते हैं। सीता जी की अग्नि परीक्षा लेकर वो सीता जी के पवित्र होने का प्रमाण भी सभी को देते हैं और वापस लौटने से पहले जब उन्हें उनके पिता राजा दशरथ दर्शन देते हैं तो एक बालक की भांती उनके अंतिम दर्शन पाकर वो बहुत प्रसन्न होते हैं।
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