माता महालक्ष्मी ने रत्नाकर और विजया को अपने सत्य स्वरूप का कराया साक्षात्कार |जय महालक्ष्मी दिव्यकथा
Mar 6, 2026•Channel
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Published2 months ago
Duration10:41
Video IDPNkPzYErEoE
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Video TypeRegular Video
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Description
जब रानी विजया का पता चलता है कि शत्रुहंता ने दूत के द्वारा वैष्णवी की माँग की थी, तो वह व्यथित होकर कहती है कि समझ में नहीं आता है कि दुर्जय वैष्णव को टेड़ी नजर से क्यों देख रहा है। राजा रत्नाकर उन्हें धीरज से काम लेने के लिए कहते है। तभी राजा रत्नाकर का वैष्णव को देखने के लिए व्याकुल होने लगता है और उसे कक्ष में न पाकर वह रानी विजया के साथ वैष्णव को राजमहल में खोजने लग जाते है। रानी विजया को लगने लगता है कि कही दुर्जय ने वैष्णवी का अपहरण तो नहीं कर लिया। वे दोनों वैष्णव को खोजते हुए वाटिका में पहुँच जाते है, जहाँ उन्हें वैष्णव ध्यान मुद्रा में बैठी हुई दिखाई देती है। लेकिन वैष्णव की ध्वनि उनके कान में पड़ती है, उन्हें समझ में नहीं आता है कि वह ध्वनि कहाँ से आ रही है। तभी वैष्णव के शरीर से माता महालक्ष्मी प्रकट होती है और रत्नाकर को याद दिलाती है कि उन्होंने उनके यहाँ क्यों जन्म लिया है – राजा रत्नाकर आप पूर्व जन्म में समुद्र राज थे, जब मैं समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी तब इस नाते मैं आपकी पुत्री बन गई और भगवान विष्णु से मेरे विवाह के समय आपने मेरा कन्यादान लिया था। लेकिन नन्ही-मुन्नी बालिका के लाड़-प्यार से वंचित रह जाने के कारण आपने पिता का यह अधिकार माँगा था। तब मैंने वचन दिया था कि त्रेतायुग में मैं आपकी पुत्री के रूप में जन्म लूंगी और आपकी यह इच्छा पूरी करूंगी। मैं बार-बार आपको अपने सत्य स्वरूप का साक्षात्कार कराया, लेकिन पुत्री मोह के कारण आप वैष्णव के दिव्य स्वरूप को देख नहीं सके। अतः अब आप मेरे उद्देश्य के रास्ते में बाधा न बने और अपने उद्देश्य से भी दूर न रहे। राजा रत्नाकर को अपनी भूल का आभास होता है और वह अपने कर्तव्य का पालन करने का वचन माता महालक्ष्मी को देते है। माता महालक्ष्मी के अंतर्धान होने के पश्चात राजा रत्नाकर वैष्णवी से कहते है कि अब उनका सबसे पहला उद्देश्य होगा शत्रुहंता का दमन।
रामायण और जय श्री कृष्णा धारावाहिक को मिले अपार प्रेम के पश्चात रामानंद सागर जी ने धार्मिक धारावाहिकों की अगली श्रृंखला के रूप में जय महालक्ष्मी धारावाहिक का निर्माण करके महर्षि मार्कण्डेय द्वारा जन कल्याण के लिए सुनाई गई माता महालक्ष्मी की दिव्य कथा को जन मानस के सामने प्रस्तुत किया है। भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जिन्हें धन, सम्पदा और समृद्धि की देवी माना जाता है और उनकी अनुकम्पा से ही मनुष्य का जीवन का संचालन सुचारू रूप से चलता है। “तिलक” चैनल “दिव्य कथाएं” के इस संकलन के माध्यम से माता महा लक्ष्मी से जुड़े कुछ अमूल्य प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसके अवलोकन/श्रवण करने से आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। अतः भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।
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