अपने पति गौतम ऋषि के श्राप से शिला बनी अहिल्या का श्रीराम ने उद्धार किया | रामायण | उद्धार कथा

May 12, 2026Channel
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Published2 months ago
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Languagehi
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Description

ताड़का वध के प्रसन्न होकर ऋषि विश्वामित्र अपने साथ श्री राम और लक्ष्मण को सीता जी के स्वयंवर के लिए मिथिला ले चलते है। उन्हें मार्ग में एक उजड़ा हुआ आश्रम मिलता है। विश्वामित्र श्री राम के प्रश्न करने पर बताते है कि यह आश्रम गौतम ऋषि के श्राप के कारण उजड़ गया है, लेकिन एक तुलसी का पौधा जीवित है क्योंकि यहाँ पर एक अभागन नारी की आत्मा वास करती है। उस नारी के साथ एक ने छल किया और दूसरे ने दण्ड दिया। वह नारी गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या थी, जिसकी सुन्दरता पर आसक्त होकर एक दिन गौतम ऋषि का रूप धारण करके इंद्र देव अहिल्या के कक्ष में घुस गए, लेकिन जब वह अहिल्या के साथ समागम करके वापस जा रहे थे कि तभी गौतम ऋषि ने छलिए इंद्र को देख लिया और क्रोध में आकर इंद्र को श्राप दे दिया। तत्पश्चात जब अहिल्या बाहर आती है तो वह समझ जाती है कि उसके साथ छल हुआ है, वह अपने पति से क्षमा माँगती है। लेकिन गौतम ऋषि उसकी एक भी नहीं सुनते है और उसे अपने श्राप से एक शिला में परिवर्तित कर देते है। तब से यह शिला किसी के आने का रास्ता देख रही है जोकि गिरे हुए का उठा सके। विश्वामित्र का आशय समझ कर श्री राम अपने चरण स्पर्श के उस अहिल्या रूपी शिला को एक सुन्दर नारी में परिवर्तित करके उसका उद्धार करते है। अहिल्या अपने प्रभु के साक्षात दर्शन कर परम लोक के लिए चली जाती है। वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए। #shreeram#ramayan #katha #uddharkatha #ramayanuddharkatha

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