दशकों से आज़ाद क्यों नहीं हो पाया 'अमीर' ग्रीनलैंड [Between Denmark & Trump] | DW Documentary हिन्दी
Mar 3, 2026•Channel
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Published2 months ago
Duration28:26
Video IDQpCM47iaXts
Languagehi
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ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बन जाना चाहिए. कम से कम अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप तो यही मानते हैं. ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा आइलैंड है, जहां अपार खनिज संपदा है. इसे अमेरिका के हासिल करने या शायद क़ब्ज़े में लेने की बात से सिर्फ़ ग्रीनलैंड के लोगों को ही चिंता नहीं हो रही है.
डेनमार्क इस बात से ख़फ़ा है, क्योंकि कभी उसकी कॉलोनी रहा ग्रीनलैंड अभी भी डेनिश साम्राज्य का एक अर्ध-स्वायत्त इलाक़ा है. लेकिन कब तक? कई ग्रीनलैंडवासी अपना भविष्य अपने हाथों में लेना चाहते हैं.
नुकान्गुआक ज़ेब ग्रीनलैंड में ही जन्मे हैं और यहां की शिकार और मछली पकड़ने जैसी सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़े हैं. वे ग्रीनलैंड की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के सहायक कोच भी हैं. यह खेल भी डेनिश उपनिवेशवादी ही ग्रीनलैंड लाए थे. वे डेनमार्क के लगातार प्रभाव की आलोचना करते हैं. डॉनल्ड ट्रंप की नई औपनिवेशिक महत्वाकांक्षाओं से उन्हें झटका लगा है.
1953 में जब ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक ज़िला बना था, तब ग्रीनलैंड को कोई स्वायत्तता नहीं मिली थी. आज भी ग्रीनलैंड राजनीतिक और आर्थिक रूप से डेनमार्क पर काफ़ी निर्भर है. कई ग्रीनलैंडवासी बर्फ़ के नीचे छिपे प्राकृतिक संसाधनों से उम्मीद लगाए बैठे हैं. जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है, ये संसाधन जल्द ही उपलब्ध हो सकते हैं. इससे सिर्फ़ अमेरिकी प्रशासन का ही ध्यान आकर्षित नहीं होगा.
वाइट माउंटेन खदान राजधानी नूक के उत्तर में है. यहां तक सिर्फ़ नाव या हेलिकॉप्टर से ही पहुंच सकते हैं. इस खदान में अंतरराष्ट्रीय निवेशक एनोर्थोसाइट नामक खनिज निकाल रहे हैं. यह खनिज इंसुलेशन मटीरियल और ग्लास फ़ाइबर जैसी चीज़ें बनाने में इस्तेमाल किया जाता है.
नील्स ओले खदान में काम करने वाले चंद ग्रीनलैंडिक फोरमेन में से एक हैं. यहां ज़्यादातर कुशल कामगार विदेशों से आते हैं. ग्रीनलैंड की कमज़ोर शिक्षा व्यवस्था के कारण कई युवा ग्रेजुएशन से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं. सोशल वर्कर आने पिपालुक ऐसे युवाओं की देखभाल करती हैं. ये युवा साझा आवासों में रहते हैं और अक्सर ऐसे परिवारों से आते हैं, जो बेरोज़गारी और शराब की लत से जूझ रहे होते हैं.
पुरानी और नई निर्भरताओं के बीच रास्ता बनाना ग्रीनलैंड के लिए बड़ी चुनौती है. नील्स ओले अपने देश के लिए ज़्यादा स्वायत्तता का सपना देखते हैं. वह बताते हैं कि यह बहुत सारे ग्रीनलैंडवासियों का सपना है.
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