लव-कुश ने नागराज को धरती माता की संतान कहकर किया उद्धार | रामायण | उद्धार कथा
Jun 23, 2026•Channel
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Description
महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में माता सीता के साथ पल रहे लव और कुश प्रतिदिन नदी में स्नान करने के बाद बगीचे से पुष्प एकत्र करके महर्षि वाल्मीकि और ऋषियों के लिए लाते है और संध्याकाल नदी किनारे एक वृक्ष के नीचे संध्या वंदन करते हैं। जब यह बात महर्षि वाल्मीकि को पता चलती है तो वह ऋषि श्रीधर को आदेश देते है कि वह उस वृक्ष के नीचे रहने वाले नागराज से जाकर कहे कि वह उस वृक्ष को छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर चले जाए। श्रीधर महर्षि के आदेश का पालन करते हुए नागराज को महर्षि का आग्रह सुनाते है। जिसे सुनकर वहाँ पर उपस्थित लव-कुश श्रीधर और नागराज से कहते है कि उनकी माता ने कहा है कि न किसी से डरना चाहिए और न डराना चाहिए। नागराज यह स्थान छोड़कर नहीं जाइए, हम सब धरती माता की संतान है, हम सबको यहाँ प्रेम से रहना है। वे दोनों तुरन्त गुरुदेव से दूसरा आदेश लेने के लिए चले जाते है। उन दोनों की बातें सुनकर महर्षि वाल्मीकि कहते है कि अति सुन्दर बात कही है तुम्हारी माता ने, तुम्हें जो ज्ञान दिया है वह दिव्य है। जाओ श्रीधर से कह दो कि मैंने अपना आदेश वापस ले लिया है। इस प्रकार लव-कुश ने नागराज को धरती माता की संतान कहकर उद्धार किया।
वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए।
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