राम-सिया की दिव्य प्रेम कथा के रहस्य जो आपने नहीं देखे
May 14, 2026•Channel
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Published2 months ago
Duration2:40:45
Video IDU5FHkKjwugc
Languagehi
CategoryPeople & Blogs
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Video TypeRegular Video
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श्री राम के जीवन में ख़ुशी के पल को नज़र सी लग जाती है उनकी माता कैकयी जो श्री राम से बहुत प्रेम करती थी कुटिल मंथरा की बातों में आकर राजा दशरथ से अपने दो वर में श्री राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजा का पद माँग लेती है जिसे सुन कर श्री राम अपने पिता और माता की आज्ञा का पालन करने के लिए वनवास को निकल पड़ते हैं उनके साथ माता सीता जी और प्रिय भाई लक्ष्मण जी उनकी सेवा के लिए साथ जाते हैं। श्री राम निषाद राज के मित्र बन जाते हैं और एक रात्रि में उनके साथ रुकने के बाद वहाँ से चले जाते हैं, इस कथा में केवट का प्रसंग भी है जो श्री राम जी, सीता जी लक्ष्मण और निषाद राज को नदी पर कराटे पार कराते हैं। दूसरी और दशरथ अपने पुत्र के वियोग में दुखी होते हैं और हालत ख़राब होने की वजह से स्वर्ग सिधार जाते हैं। वन में लक्ष्मण जी माता सीता और श्री राम की सेवा करते हैं और उनके लिए कुटिया भी बनाते हैं। भरत अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद अपने बड़े भाई श्री राम को वापस अयोध्या लाने के लिए आता है और अपनी माता के किए पर श्री राम से क्षमा भी माँगता है। श्री राम अपने पिता की मृत्यु की बात सुनकर दुखी होते हैं और भरत को समझाते हैं की वो पिता की आज्ञा को अवश्य पूर्ण करेंगे। श्री राम भरत को अयोध्या का राजपाठ सँभालने के लिए कहते हैं। भरत श्री राम को समझाने की बहुत कोशिश करता है लेकिन श्री राम की आदेश को सुनकर वो उनकी पादुकाओं को लेकर अयोध्या वापस लौट जाते हैं और अयोध्या के समीप पहुँच कर श्री राम की भाँति वनवासी का रूप धारण कर श्री राम जी की तरह वनवासी जीवन बिताते हुए राज पाठ सम्भालता है।
इस कथा में श्री राम के राजा बनाने के बाद माता सीता का अयोध्या को छोड़ कर जाने की कथा दिखायी गई है। एक दिन जब श्री राम अयोध्या का राज पाठ का कार्य कर रहे थे तो उन्हें एक गुप्तचर प्रजा में चल रहे माता सीता को लेकर विचारों के बारे में बताता है जिसे सुनकर श्री राम आहत हो जाते हैं और उनके मन में वो बातें उन्हें चिंता में दल देते हैं श्री राम को चिंतित और विचलित देख माता सीता अपनी दासी से इसका कारण पता करने के लिए भेजती है। दासी माता सीता को श्री राम की चिंता के बारे में बताती है की प्रजा माता सीता के चरित्र और उनके पति व्रता होने पर सवाल कर रहे हैं। यह सुन माता सीता समझ जाती हैं की श्री राम किस विवषता में घिरे हुए हैं। माता सीता श्री राम से मिलती हैं और उन्हें कहती हैं की उनकी चिंता को वो दूर करने के लिए अयोध्या को छोड़ कर चली जाना चाहती हैं। श्री राम सीता जी को समझाते हैं लेकिन वो उन्हें वचन में बांध देती हैं और अपने कुल के सम्मान के लिए इतना बड़ा त्याग कर अयोध्या को छोड़ कर चली जाती हैं। माता सीता वाल्मीकि जी के आश्रम में पहुँच जाती है और वाल्मीकि जी उन्हें अपनी बेटी की तरह आश्रय देते हैं। जहां माता सीता लव कुश को जन्म देती हैं। जिनका नाम कारण वाल्मीकि जी शत्रुघ्न के हाथों करवाते हैं।
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