श्रीकृष्ण ने लीला रचा कर सुदामा को अपने साथ भोजन कराया | श्री कृष्ण | दिव्य कथाएँ
Mar 4, 2026•Channel
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Published2 months ago
Duration16:10
Video IDUCX0lfhKEmQ
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Video TypeRegular Video
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भूखे-प्यासे सुदामा को अपना नाम जपते देख श्री कृष्ण की माया से एक व्यक्ति खण्डहर में आता है और वह सुदामा को बताता है कि ठाकुर सांवले शाह के घर पोता हुआ है और जो दस कोस की परिधि के हर गाँव में भोजन बँटवा रहा है। उसने तुम्हारे घर में भी खीर पूड़ी के टोकरे पहुँचाए हैं और भरपेट भोजन से उसके चारों बच्चों तृप्त हो चुके हैं। यह बात सुन कर सुदामा को संतुष्टि होती है और वह भी अपना पेट भरने के लिए मन बना लेता है और उस व्यक्ति के साथ पास के गाँव के लिए जाने को उठ खड़ा होता है। मुरली मनोहर बने श्रीकृष्ण उसे ताना देते हैं कि तुम तो बड़े स्वार्थी ब्राह्मण हो। मैंने तुम्हारे कारण अपनी पत्नी के हाथ का बना भोजन नहीं किया और तुम ठाकुर सांवले शाह का भोजन लेने के लिए जा रहे हो और मुझे पूछ भी नहीं रहे हो। सुदामा को हड़बड़ी में हुई इस गलती का आभास होता है। वह मुरली मनोहर से क्षमा माँगते हैं और उस व्यक्ति का उपकार मानते हुए कहते हैं कि मेरे का नाम का भोजन यहीं रखा है। इसके बाद सुदामा बारम्बार क्षमा माँगते हुए मुरली मनोहर के साथ भोजन करते हैं। भोजन उपरांत मुरली मनोहर स्नेह पूर्वक सुदामा को मोतीचूर के लड्डू खिलाते हैं। यह दृश्य देखकर देवी रुक्मिणी भाव-विभोर होकर कहती हैं कि हे प्रभु, आपकी लीला न्यारी है। अपने मित्र की सहायता के लिए आप कितने जतन कर रहे हैं। कभी सांवले शाह बनकर और कभी मुरली मनोहर बनकर। श्रीकृष्ण कहते हैं कि सुदामा स्वाभिमानी है, इसलिए उसके स्वाभिमान की लाज रखने के लिए मुझे यह सब करना पड़ा। मैंने कई अवतार लिए हैं किन्तु यह ऐसा पहला अवतार है जब मुझे दो-दो मित्र मिले हैं, एक अर्जुन, दूसरा सुदामा। अतः मैं चाहता हूँ कि जब-जब कोई सच्ची मित्रता का आदर्श देखना चाहे, तो वह हमारे व्यवहार को देखे।
संसार में यदि मनुष्य को कर्म के साथ धर्म के सही सामंजस्य को समझना हो तो इसके लिए श्रीमद् भगवत गीता से बड़ा ग्रंथ नहीं हो सकता। यह ग्रंथ दिव्य है इसीलिए विश्व में सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्मों को मानने वाले मनुष्य भी श्री मद् भगवत गीता और श्री कृष्ण के अनुयायी है। सनातन धर्म में श्री भगवान कृष्ण को सोलह कलाओं से पूर्ण अवतार माना गया है। मानव जीवन से जुड़े सभी प्रश्नो का उत्तर आपको श्रीकृष्ण के जीवन से मिल सकता है। श्री भगवत् गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद व उपदेशों का संकलन है। इन उपदेशों को आप अपने जीवन में समाहित कर परमात्मा से जुड़ सकते है। “तिलक” अपने संकलन “दिव्य कथाएं” के इस चरण में श्री कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।
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