देश छोड़ते प्रोफेसर, वाइट सुप्रिमेसी, सियासत में धर्म: कहां खड़ा है अमेरिका? | DW Documentary हिन्दी
May 23, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration54:47
Video IDUpZPyhB_aos
Languagehi
CategoryNews & Politics
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जो देश कभी लोकतंत्र की मशाल रहे, वहां आज लोकतंत्र ख़तरे में दिख रहा है. दुनिया के कई देश तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं और जिस लोकतंत्र को ख़ून-पसीने से हासिल किया गया था, उसे संकट में डाल रहे हैं. इन्हीं में से एक देश है अमेरिका.
DW की ये नई डॉक्यूमेंट्री ‘ख़तरे में लोकतंत्र: जान दुइंदार और ट्रंप का अमेरिका’ इन संघर्षों के मूल में एक गंभीर नज़र डालती है. ये उन देशों को आगाह करती है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है.
लगातार बंट रही इस दुनिया में आज के लोकतंत्र कितने मज़बूत हैं?
तुर्की के खोजी पत्रकार जान दुइंदार इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रहे हैं. जान 2016 से निर्वासन में जर्मनी में रह रहे हैं. DW की ओरिजनल डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ ‘गार्जियन्स ऑफ़ ट्रुथ’ में वो मेक्सिको, बेलारूस और अपने देश तुर्की की कहानियां दिखा चुके हैं. वो ऐसे लोगों से मिले, जो उन्हीं की तरह भ्रष्ट संस्थाओं और पंगु मीडिया के नतीजे झेल रहे हैं. बढ़ती तानाशाही को क़रीब से अनुभव करने के बाद दुइंदार का मानना है कि अब चेतावनी देने का समय आ गया है, क्योंकि दुनियाभर में लोकतंत्र पर ख़तरा बढ़ता जा रहा है.
पहले एपिसोड ‘ख़तरे में लोकतंत्र: जान दुइंदार और ट्रंप का अमेरिका’ में हम अमेरिका देखेंगे. 2026 में अमेरिका में अपनी स्थापना की 250वीं जयंती मनाएगा. आधुनिक लोकतंत्र का पालना रहा ये देश अभी भारी दबाव में है. सियासी खेमों में एक-दूसरे के प्रति ज़रा भी मुरव्वत नहीं रह गई है. आलोचक मानते हैं कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बहुत ही तानाशाही रवैये से सरकार चला रहे हैं. वह और उनके समर्थक आलोचकों पर ज़ोरदार हमले कर रहे हैं.
फ़िल्म के डायरेक्टर जान दुइंदार और डेमिड शेरोंकिन एक ऐसे शख़्स से मिले, जो ख़ुद निशाने पर आ गए हैं. रटगर्स यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर मार्क ब्रे को ‘डॉ. एंटीफ़ा’ कहकर निशाना बनाया गया. जब दक्षिणपंथी युवा संगठन ‘टर्निंग पॉइंट USA’ के सदस्यों ने उन्हें यूनिवर्सिटी से हटाने के लिए पिटीशन डाली, तो प्रोफ़ेसर को जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं. इस वजह से वह और उनका परिवार देश छोड़कर स्पेन चले गए. डायरेक्टर्स अमेरिकी कॉलेज कैंपसों और एक राजनीतिक सम्मेलन के बीच सफ़र करते हैं. वहां वे छात्र कार्यकर्ताओं, ‘टर्निंग पॉइंट USA’ के सदस्यों और प्रोफ़ेसरों से बातचीत करते हैं. ये डॉक्यूमेंट्री लोकतंत्र के अलग-अलग और आपस में टकराते हुए विचारों का एक तनावपूर्ण टकराव सामने लाती है.
अमेरिका में अभिव्यक्ति की आज़ादी और लोकतंत्र की स्थिति क्या है? क्या अमेरिकी लोकतंत्र वाक़ई में ख़तरे में है?
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