हनुमान जी ने अर्जुन के अहंकार का किया नाश | श्री कृष्ण उद्धार कथा
Jun 13, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration31:23
Video IDWB8hnmFhthg
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Video TypeRegular Video
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Description
भीम के अहंकार का नाश करने के बाद श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय सखा अर्जुन के अहंकार को भी समाप्त करने का निश्चय किया। एक दिन वन मार्ग से जा रहे अर्जुन का मार्ग बकासुर राक्षस का भाई भयासुर रोक लेता है। एक भयंकर युद्ध करके अर्जुन उसका वध कर देते है, जिससे उनका अहंकार और भी बढ़ जाता है। जिसके कारण अर्जुन आगे मार्ग में पड़ने वाली नदीं को अपने मार्ग से हटने का आदेश देते हुए कहते है कि यदि वह मार्ग से नहीं हटी तो वह उसे सुखा देंगे। नदी उन्हें समझाती है कि यदि उन्होंने ऐसा किया तो असंख्य जीवों का विनाश हो जाएगा। अंततः अर्जुन ने अपने बाणों से सेतु बनाकर नदी पार कर लेते है, जिससे उनका अहंकार और बढ़ जाता है। हनुमान जी को अर्जुन के इस अहंकार को अनुभव हो जाता है और वह श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते है कि वह अर्जुन को सही मार्ग दिखाएँ। लेकिन श्रीकृष्ण ने यह कार्य हनुमान जी को ही सौंप देते है। हनुमान जी वृद्ध वानर का रूप धारण करके पत्थरों से बने सेतु के निकट अर्जुन का मार्ग रोक लेते है। अर्जुन ने श्रीराम द्वारा बनाए गए पत्थरों के सेतु पर प्रश्न उठाता है और अपने बाणों से सेतु बनाने की श्रेष्ठता का दावा करता है। इस पर हनुमान जी उन्हें चुनौती देते है कि उनके बाणों का सेतु उनके भार को सहन नहीं कर पाएगा। अर्जुन ने चुनौती स्वीकार करते हुए बाणों का सेतु का निर्माण करते है, परन्तु जैसे ही हनुमान उस पर कूदते है, बाणों से बना सेतु तत्काल टूट जाता है। इसके साथ ही अर्जुन का अहंकार भी चूर-चूर हो जाता है। अपनी पराजय से व्यथित होकर अर्जुन आत्म दाह करने का निर्णय करते है, तभी श्रीकृष्ण प्रकट होकर उन्हें रोकते है और समझाते है कि तुम्हारे अहंकार का नाश होना ही सच्ची विजय है और अपने पाप का दण्ड स्वयं देना उचित नहीं। यह वानर कोई साधारण नहीं, बल्कि पवनपुत्र हनुमान जी हैं। यह जानकर अर्जुन ने विनम्र होकर उनसे क्षमा माँगी। हनुमान ने उन्हें उपदेश दिया कि जो योद्धा अपने अहंकार पर विजय पा लेता है, वही सच्चा विजेता होता है। श्रीकृष्ण भी अर्जुन को भविष्य के बारे में एक महत्वपूर्ण बात बताते हैं कि कुरुक्षेत्र में एक महायुद्ध होने वाला है, जिसके केन्द्र बिंदु तुम ही बनोगे और तुम्हें यह युद्ध हर अवस्था में जीतना है।
"भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जीवन का उद्देश्य कंस के वध और महाभारत के युद्ध तक सीमित नहीं था, बल्कि अपनी विभिन्न लीलाओं के माध्यम से धर्म, करुणा, प्रेम और न्याय का संदेश प्रदान करना था। अपने भक्तों और मानवता के लिए संकट बनें अधर्मियों का विनाश करके मानव में ईश्वर के प्रति आस्था, श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करना था। उन्होंने सिखाया कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर मानव कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। उनके द्वारा श्रीमद्भागवत के माध्यम से दिए गीता के उपदेश की प्रासंगिकता को अन्य धर्म को मानने वालों ने भी स्वीकार किया। उन्होंने अपने जीवन में अपने भक्तों के साथ शत्रुओं का भी उद्धार किया था। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक उन उद्धार कथाओं संकलित करके आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसका आप भक्ति भाव से आनन्द ले और तिलक से जुड़े रहे। जय श्री कृष्णा
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