देवी वैष्णव के जन्म दिन पर मनाया गया महा उत्सव | जय महालक्ष्मी | दिव्य कथा
Jun 5, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration9:45
Video IDZmSMI2cgZJY
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Video TypeRegular Video
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Description
"राजसी सुखों को त्याग साध्वी के वेश में राजमहल में रहने वाली अपनी पुत्री वैष्णवी में राजा रत्नाकर और रानी विजया को वैष्णवी में हमेशा माता लक्ष्मी का स्वरूप दिखाई देने लगता है। माता के इस स्वरूप के दर्शन से तृप्त रत्नाकर वैष्णवी के जन्मदिन पर उसकी इच्छा के अनुसार एक महायज्ञ का आयोजन कराते है। इस महायज्ञ में चारों दिशाओं से जाने-माने ऋषि-मुनि और साधु-संत एकत्र होते है। मंत्रोच्चार के साथ महायज्ञ प्रारम्भ होता है। महायज्ञ करा रहे ऋषि महाराज रत्नाकर की प्रशंसा करते हुए कहते है कि महाराज की धर्म में रुचि और धर्मबद्धता के कारण माता वैष्णवी ने उनके यहाँ पुत्री के रूप में जन्म लिया है। तभी कुछ सैनिक यज्ञ में बलि देने के लिए एक बकरे को लेकर आते है और महाराज की आज्ञा लेकर बलि चढ़ाने के लिए तलवार उठा लेते है। यह देख वैष्णवी अपने आसन से उठ खड़ी होती है और उन्हें रोकते हुए कहती है कि ये बलि नहीं होगी। परम्पराएं समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए हमें अनुचित मान्यताओं को अस्वीकार करना चाहिए। एक ऋषि कहता है कि बलि देने से देवी-देवता प्रसन्न हो जाते है। उत्तर में वैष्णवी कहती है कि देवी-देवता को श्रद्धा से चढ़ाए हुए केवल एक फूल की पंखुड़ी से प्रसन्न हो जाते है। बलि के लिए किसी प्राणी बलिदान देना ईश्वर को प्यारा नहीं है, यदि बलि देना ही है तो अपने अहंकार, अपने क्रोध, दूसरों के प्रति अपनी घृणा, स्वार्थी स्वभाव और उन विकारों की बलि दो, जो आपको मानव से दानव बनाकर रख देते हैं। अपने अंदर बैठे पशु की बलि दो, जो निष्पाप पशुओं से अति उत्तम बलि है। जिससे तुम उत्तम सर्वश्रेष्ठ मानव बन जाओगे, जैसा कि ईश्वर ने तुम्हें बनाया है और फिर तुम्हारे हर कार्य धर्म से पूर्ण होंगे और ऐसे हर कार्य पर तुम्हें अनगिनत पुण्य प्राप्त होंगे। यह सुन उपस्थित ऋषि-मुनि कहते है कि देवी वैष्णवी का कथन उचित ही है। हमारा ज्ञान इनके ज्ञान के आगे शून्य मात्र है। देवी वैष्णव का आदेश हमें मन से स्वीकार है और वचन देते है कि हम सभी निष्पाप पशुओं के स्थान पर अपने अंदर के पशु भाव की बलि देंगे। सभी जय वैष्णो देवी का जयकारा लगाने लगते है और सैनिक बलि के लिए लाए गए बकरे को मुक्त कर देते है।"
रामायण और जय श्री कृष्णा धारावाहिक को मिले अपार प्रेम के पश्चात रामानंद सागर जी ने धार्मिक धारावाहिकों की अगली श्रृंखला के रूप में जय महालक्ष्मी धारावाहिक का निर्माण करके महर्षि मार्कण्डेय द्वारा जन कल्याण के लिए सुनाई गई माता महालक्ष्मी की दिव्य कथा को जन मानस के सामने प्रस्तुत किया है। भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जिन्हें धन, सम्पदा और समृद्धि की देवी माना जाता है और उनकी अनुकम्पा से ही मनुष्य का जीवन का संचालन सुचारू रूप से चलता है। “तिलक” चैनल “दिव्य कथाएं” के इस संकलन के माध्यम से माता महा लक्ष्मी से जुड़े कुछ अमूल्य प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसके अवलोकन/श्रवण करने से आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। अतः भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।
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