हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर बोलते हुए डॉ शंभूनाथ, #भारतीयभाषापरिषद् ,9.6.26
Jun 11, 2026•Channel
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Published1 month ago
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Languagehi
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सदीनामा प्रकाशन
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Since the dawn of millennium
आज की पत्रकारिता में सूचना क्रांति से ज्यादा सूचना भ्रांति परिलक्षित : Dr शंभूनाथ
पैरोकार पत्रिका द्वारा, हिंदी पत्रकारिता की द्वि - शताब्दी समारोह का आयोजन भारतीय भाषा परिषद के सभागार में किया गया।
इस अवसर पर पैरोकार पत्रकारिता शिखर सम्मान से सम्मानित गंगा प्रसाद ने कहा कि पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य में वही अच्छा पत्रकार बन सकता है जिसके हाथ में कटोरा हो, मतलब जिसके पास खोने के लिएं कुछ न हो।
वरिष्ठ पत्रकार , संतन कुमार पांडेय के अनुसार " मैने अनछुए पहलुओं पर अपनी कलम चलाई जिन्हे पाठकों ने दिल से सराहा।
डाक्टर राजाराम त्रिपाठी : पहला समाचार पत्र हिंदी भाषी प्रदेश से नही वरन बंगाल की भूमि से । बंगाल भूमि पत्रकारिता की जननी।
बीज वक्तव्य देते हुएं डाक्टर शंभूनाथ , निदेशक भारतीय भाषा परिषद ने कहा कि पत्रकारों का सम्मान, जोखिम का सम्मान है, क्योंकि वे जोखिम उठा कर सूचना भेजते है। पत्रकारिता आसान नही । प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया की अपेक्षा आज भी विश्वसनीय है। आज के दौर में सूचना क्रांति से ज्यादा सूचना भ्रांति आ गई है।
शाहनवाज अख्तर : छोटे पत्रकार ज्यादा अच्छा कार्य कर रहे है।¹1
जितेन्द्र जीतांशू: जिन्होंने 77 को देखा है, अन्ना हजारे को जेल जाते देखा है, वे समझ सकतें है कि आजादी के लिए जिन लोगो ने समाचार पत्र निकाले है वे कितनी बार जेल गए और कितनी शारीरिक - मानसिक यंत्रणा झेली। सत्ता का विरोध करना जेल को निमंत्रण देता है।
शकुन त्रिवेदी: पत्रकारों की समस्या सुरक्षा है, उनके लिएं आवाज उठानी चाहिए ताकि खोजी पत्रकारों को भी जान - माल की सुरक्षा मिल सके अन्यथा लश्कर भी तुम्हारा, सरदार भी तुम्हारा तुम झूठ को सच लिखो अखबार तुम्हारा।
श्रीपदा: पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति देख कर निराश नहीं होना चाहिए बल्कि उसी रास्ते पर चलना चाहिए जिसे निराला, महावीर प्रसाद द्विवेदी ने दिखाई।
रेशमी पांडा मुखर्जी : पत्रकारों की जिम्मेदारी न कभी झुके न रुके वरन राष्ट्रीय जागरण का उद्देश्य लेकर चले।
कार्यक्रम के अध्यक्ष, विशंभर नेवर ने अपने वक्तव्य में कहा कि जुगल किशोर शुक्ला ने कानपुर से कोलकाता आ कर हिंदी अखबार निकाला। कोलकाता हिंदी समाचार पत्र की ही नही अपितु अंग्रेजी, उर्दू , फारसी, बंगाली समाचार पत्रों की जननी है। पत्रकारिता जोखिम भरी है ये समझकर ही आना चाहिए वैसे ही जैसे कि गर्भवती महिला प्रसव वेदना को जानते हुए भी गर्भ धारण करती है।
हृदय नारायण सिंह, ' अभिज्ञात ' ने कुशलता पूर्वक संचालन किया।
धन्यवाद ज्ञापन बिमल शर्मा ने दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पैरोकार पत्रिका के संपादक अनवर हुसैन एवं उनकी टीम की अहम भूमिका थी। Sadinama has striven for excellence in its works which has led to accolades for the company
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