बॉलीवुड छोड़ा, बुद्ध अपनाया:बरखा मदान-साक्य धम्मदिना से प्रेरणादायी संवाद Nagpur #buddhistteachings

May 15, 2026Channel
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Published1 month ago
Duration1:47:51
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Languagehi
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Description

पूज्य भिक्खुणी ज्ञाल्टेन समतेन 'अब मेरी सुन्दरता मेरे चित्त-वाणी-कर्म से जानी जाएगी अब मै मन से सुन्दर हूं पूज्य भिक्खुणी साक्य धम्मदिन्ना मैंने अभिधम्म को नहीं चुना बल्कि अभिधम्म ने मुझे चुना 'अभिधम्म' हमारे मन में आनेवाले विचारों के प्रति अधिक जागरुक बनाता है अपने चित्त को अब मैं और भी बेहतर तरिके से देखने लगी हूं 'अभिधम्म' को केवल पढने से 'विपस्सना' बेहतर समझ में आने लगी है पूज्य भिक्खुणी ज्ञाल्टेन समतेन मनुष्य जीवन बहुत मूल्यवान है मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है? यह समझना बहुत जरूरी है पूज्य भिक्खुणी साक्य धम्मदिन्ना 'तकीनीकी' अच्छे के लिए है और बुरे के लिए भी मोबाईल का इस्तेमाल किस चीज के लिए कर रहे हैं? यह बात महत्वपूर्ण है 'विपस्सना' के लिए बच्चों को प्रेरीत करें पूज्य भिक्खुणी ज्ञाल्टेन समतेन 'डिजीटल डी-टॉक्स' एक अच्छा तरिका है पूज्य भिक्खुणी ज्ञाल्टेन समतेन क्लेश को अपने अंदर रखकर क्या कीजिएगा? चीज़ों के प्रति अपना मोह छोड दीजिए अपने भीतर 'शान्ति' को विकसित करना बहुत जरूरी है पूज्य भिक्खुणी साक्य धम्मदिन्ना आंख बंद करके बैठना कोई मेडिटेशन नहीं 'ध्यान' हमें दिन में चौबीस घंटे करना है माइंडफुलनेस प्रैक्टिस करें पूज्य भिक्खुणी ज्ञाल्टेन समतेन बिना शील के प्रज्ञा नहीं और प्रज्ञा के सिवाय समाधि नहीं करियर में सुख-शान्ति हो, जीवीका के साधन सहीं होने चाहिए पूज्य भिक्खुणी साक्य धम्मदिन्ना जो गलत कर रहा है उसे न्याय के मार्ग पर लाना चाहिए शीलवान संघ की उपस्थिति से विवाद खत्म हो जाते है श्रध्दा के साथ प्रज्ञा आवश्यक है पूज्य भिक्खुणी ज्ञाल्टेन समतेन गुरु-शिष्य परम्परा महायान की नींव है। पूज्य भिक्खुणी साक्य धम्मदिन्ना भिक्षु-भिक्षुणीयों के लम्बे रि-ट्रीट की व्यवस्था जरूरी है। पूज्य भिक्खुणी ज्ञाल्टेन समतेन चीवर का बहुत आदर सत्कार होता है बौध्द जनों में बुध्द धम्म की ज्योत चौबीस घंटे अपने मन में जलाए बैठना है केवल त्रुटीयां देखने से काम नहीं चलेगा हमारे भीतर अच्छाईयां भी है उसे देखना और विकसित करना सिखे पूज्य भिक्खुणी साक्य धम्मदिन्ना 'थेरी गाथा' महिलाओं की प्रेरणास्त्रोत है पूज्य भिक्खुणी ज्ञाल्टेन समतेन यदि स्वयं से प्रेम करते है तो सबसे प्रेम की भावना रख पाऐंगे पूज्य भिक्खुणी साक्य धम्मदिन्ना हम सुधरने लगे तो आसपास की तरंगे धम्ममय होगी

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