शेषनाग रूपी लक्ष्मण ने मेघनाद का अंत करके किया सृष्टि का उद्धार | रामायण | उद्धार कथा
Apr 2, 2026•Channel
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Description
रणभूमि पर मेघनाथ और लक्ष्मण पुनः आ जाते है, जिससे शक्ति, कौशल, बल, पराक्रम टकराने लगते है, इन वीरों के तीरों से बादल छा जाते है। दोनों ही अपने प्रण के कारण अविराम जूझने लगते है। उनका यह युद्ध एक महासंग्राम का रूप ले लेता है। शक्ति प्रहार को सह जाने वाले योद्धा को मारना इतना आसान नहीं था और जीते जी रण छोड़ जाना वीरों का काम नहीं होता है। रण को कोई अंत न होता देख मेघनाथ बड़े ही गर्व से ब्रह्मास्त्र चलाता है, जिसे देख लक्ष्मण विनम्र होकर ब्रह्मास्त्र को शीश झुकाते है, जिससे ब्रह्मास्त्र बिना प्रभाव के लौट जाता है। इंद्रजीत इस माया को समझ नहीं पाता है और पाशुपतास्त्र को अपने धनुष पर संधान कर लक्ष्मण पर चलाता है, उस पाशुपतास्त्र में स्वयं साक्षात पशुपति भगवान शिव वास करते है। लक्ष्मण को देख पाशुपतास्त्र भी ओझल हो जाता है। अंततः मेघनाथ दुष्टों का संहार करने वाले नारायणास्त्र का आह्वान करके लक्ष्मण पर चलाता है, लेकिन शेषनाग के अवतार लक्ष्मण पर कैसे प्रहार कर सकता था, वह भी लक्ष्मण के चक्कर काट कर वापस लौट आता है। मेघनाथ को लक्ष्मण की शक्ति का आभास हो जाता है और वह अपनी मायावी शक्ति दिखाते हुए आकाश से लक्ष्मण पर बाणों से प्रहार करने लगता है। जिसे देख लक्ष्मण भी उसकी उद्दंडता का दण्ड देने का निश्चय कर लेते है और अपने बाण को श्रीराम की आन की सौगंध देते हुए मेघनाद पर प्रहार करते है, जो उसके मस्तक को काट कर घड़ से अलग कर देता है। इस प्रकार स्वयं शेषनाग रूपी लक्ष्मण मेघनाद का अंत करके सृष्टि का उद्धार करते है।
वेद-पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परम ईश्वर श्री हरि ने समय-समय पर धर्म की हानि को रोकने और अधर्म के विनाश करने के लिए मानव रूप में अवतार लिया और मानव कल्याण के लिए धर्म की पुनःस्थापना की तथा साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया। क्योंकि अवतार लेने का उद्देश्य केवल अधर्मियों का विनाश करना ही नहीं होता था बल्कि जनमानस में ईश्वर के प्रति भक्ति और उनके विश्वास को दृढ़ करना भी था। भगवान श्री राम ने जब त्रेतायुग में अवतार लिया, तब उन्होंने केवल रावण का वध ही नहीं किया बल्कि इस अवतार के माध्यम से अपने अनेकों भक्तों का उद्धार भी किया। आपका प्रिय धार्मिक चैनल तिलक अपनी इस शृंखला में भगवान श्री राम के द्वारा किए अपने भक्तों के उद्धार की कथाओं को प्रस्तुत कर रहा है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए।
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