जब रावण ने हनुमान को दिया चैलेंज, "एक मुक्का तू मार, एक मैं मारूंगा" !!

Dec 19, 2024Channel
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PublishedDec 19, 2024
Duration4:32
Video IDlagOGf4rOBU
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CategoryFilm & Animation
PrivacyPublic
Made for KidsNo
Video TypeRegular Video

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Description

जब रावण ने हनुमान को दिया चैलेंज, "एक मुक्का तू मार, एक मैं मारूंगा" !! Script of this Video : एक तरफ महाबली हनुमान खडे थे और सामने था रावण, बहुत बड़ा बलवान. रावण हनुमान जी से बोला कि चलो युद्ध किया जाए. हनुमान जी बोले, "मैं सदा तैयार हूँ, पर फैसला कैसे होगा की कौन जीता, कौन हारा. तुम भी बलवान हो और हम पर राम जी की कृपा है. इसलिए युद्ध बहुत लम्बा खिंच सकता है". तो रावण बोला, "लंबा वाला युद्ध नहीं करेंगे, बस एक एक मुक्के का युद्ध करेंगे. एक मुक्का मैं मारूंगा और एक तुम मारना, जो खडा रह जाएगा, वह जीता माना जाएगा". रावण की बात सुनके हनुमान जी बोले, "मैं तो तैयार हूँ, पर तुम एक बार फिर सोच लो लंका नरेश". अब रावण था अहंकारी, हनुमान की बात सुनकर हंसने लगा. हनुमान फिर बोले, "चलो ठीक है फिर, पर पहले मुक्का तुम ही मारो रावण". रावण बोला : "मैं क्यों, तुम क्यों नहीं "!! इस पर हनुमान जी बोले, "क्योंकि कहीं मैंने पहले मुक्का मार दिया तो पता नहीं तुम्हारी मुक्का मारने की बारी आएगी भी या नहीं. तुम्हारी मुझे मुक्का मारने की इच्छा मन की मन में ही रह जाएगी. इसलिए पहले तुम ही मुक्का मार लो". हनुमान जी की ये बात सुनकर रावण को गुस्सा आ गया और उसने अपनी पूरी शक्ति से हनुमान जी के मुंह पर बहुत जोर का मुक्का दे मारा. तुलसीदास जी ने इस मुक्के के बारे में लिखा है की, "जानु टेकि कपि भूमि न गिरा" यानि, हनुमान जी घुटने के बल ही बैठे रह गए, रावण उनको जमीन पर नहीं गिरा पाया. रावण हैरान, अपनी बीसों आंखें बार बार बंद करे, बार बार खोले. उसे यकीन ही ना हो. तो हनुमान जी बोले, "आश्चर्य मत करो रावण, मैं एकदम फिट हूँ, पर अब तुम तैयार हो जाओ मुक्का खाने के लिए". अब जब हनुमान पर रावण के मुक्के का तनिक सा भी असर नहीं हुआ, तो रावण बिना मुक्का खाये ही घबरा गया और बोला, "मैं भी तैयार ही हूँ" . अब जैसे ही हनुमान जी ने पूरी शक्ति से हाथ ऊपर उठाया, तो रावण से भी ज्यादा ब्रह्मा जी और शंकर जी घबरा गए. दोनों चुपके से मैच का आनंद ले रहे थे. ब्रह्मा जी बोल उठे, रोको रोको, कहीं हनुमान ने मुक्का मार दिया और रावण मर गया, तो राम जी का तो पूरा प्रोग्राम ही फेल हो जाएगा. जिस चीज के लिए धरती पर जन्म लिया है, वह रामायण ही पूरी नहीं हो पाएगी. अब हनुमान जी ने मुक्का मारने के लिए जैसे ही ऊपर देखा, तो ब्रह्मा जी हाथ जोड़े दिखे, बोले कि "दया करो हनुमान जी. रावण मर गया तो रामायण का क्या होगा, भगवान राम क्या करेंगे फिर". अब ब्रह्मा की बात सुनकर हनुमान बोले, "चलो ठीक है, पूरी ताकत से नहीं मारूंगा, पर थोड़ा सा स्वाद तो चखा लेने दो रावण को". इस घटना के बारे में तुलसीदास जी ने लिखा है कि रावण कोई साधारण वीर नहीं था. "जो दससीसु महीधर ईस को बीस भुजा खुलि खेलनिहारो।" और इतने शक्तिशाली रावण को जब हनुमान जी ने मुक्का मारा, "सो हनुमान हनी मुठिका, गिरिगो गिरिराज ज्यों गाज को मारो ॥" तो रावण को ऐसा लगा जैसे उस पर किसी ने बिजली की गति से हिमालय पर्वत दे मारा हो, और इसी के साथ रावण धरती पर बेहोश होकर गिर गया और काफी देर तक वहीँ पडा रहा. फिर जब उसकी आख खुली तो बोला, "बड़े बलवान हो हनुमान जी आप तो". इस पर हनुमान मन ही मन बोले, "बल तो ब्रह्मा जी और शंकर जी ने दिखाने ही नहीं दिया. बल दिखा दिया होता तो तुम यह बात बताने के लिए बचते ही नहीं". गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है, "कपि बल बिपुल सराहन लागा॥" अहंकारी रावण सिर्फ हनुमान जी के बल की सराहना करता था, और किसी के बल की नहीं. तभी तो तुलसीदास जी ने कहा है, "रामदूत अतुलित बल धामा" यानि हनुमान जी का परिचय रामदूत के रूप में और महिमा अतुलित बलधाम के रूप में होती है. जय हनुमान . जय जय हनुमान

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