पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित जलसंवाद कार्यक्रम.
May 17, 2026•Channel
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📍नागपुर
खेती, किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्येश्य से कार्यरत पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में नागपुर में 17 और 18 मई 2026 को आयोजित दो दिवसीय नागपुर जलसंवाद-2026 और जलक्रांति परिषद-2026 के अंतर्गत आज जलसंवाद कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ। कार्यक्रम में विशेष अतिथी के रूप में देहरादून, उत्तराखंड से पद्म भूषण श्री अनिल जोशी जी, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश से जलयोद्धा पद्मश्री श्री उमाशंकर पांडे जी, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से पद्मश्री श्री सेठपाल सिंह जी, वॉटर टॉक्स न्यूज, आसाम के नॉर्थ ईस्ट इंडिया समन्वयक श्री केशोब कृष्ण छत्रधारा जी, सेंटर फॉर वॉटर पीस के मुख्य कार्यकारी निदेशक श्री संजय कश्यप जी, कोहिमा, नागालैंड के जल एवं पर्यावरण विशेषज्ञ श्रीमती स्वेडेविनो नात्सो जी उपस्थित रहें। महाराष्ट्र के राज्यमंत्री श्री आशीष जयस्वाल जी, राज्यमंत्री श्री पंकज भोयर जी, पूर्व मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार जी, पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के पदाधिकारी और अन्य मान्यवर उपस्थित थे।
‘जल ही जीवन है’ की समर्पित भावना के साथ सकारात्मकता और निरंतरता बनाए रखते हुए पुर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था ने विगत 25 वर्षों से जल संवर्धन एवं भूजल पुनर्भरण का कार्य निष्ठापूर्वक किया है। किसान आत्महत्या-मुक्त विदर्भ के उद्येश्य से जलसंवर्धन का उपाय को आगे बढ़ाते हुए आयोजित किया गया ‘नागपुर जलसंवाद-2026’ एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण संवाद है, जिसमें विदर्भ में किसान आत्महत्याओं की समस्या के समाधान के रूप में जल संवर्धन एवं भूजल पुनर्भरण पर विशेष चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर देश भर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता एवं जल प्रबंधन से जुड़े अनुभवी व्यक्तित्व अपने विचार साझा करेंगे। इस संवाद में जल संवर्धन, जल संचयन तथा समग्र जल प्रबंधन के माध्यम से खेती को स्थिरता देने के उपायों पर गहन मंथन होगा। किसान सशक्तिकरण और आत्महत्या-मुक्त विदर्भ के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह संवाद एक ठोस राष्ट्रीय पहल बनेगा।
बहते हुए पानी को चलने के लिए लगाए, चलते हुए पानी को रुकने के लिए लगाए और रुके हुए पानी को जमीन को पीने के लिए लगाए। गांव का पानी गांव में, घर का पानी घर में और खेत का पानी खेत में। यहीं जल व्यवस्थापन के मूल तत्व है। पानी को रोकना, जमा करना और बहने के बजाय ज़मीन में रिसने देना, इन्हीं तीन बातों पर गांव की समृद्धि निर्भर करती है । बहते हुए पानी को चलाने का मतलब है पहाड़ों से तेज़ी से बहने वाले पानी की रफ़्तार को कम करना। चलते पानी को रोकने का मतलब है झीलों और नहरों को गहरा और चौड़ा करके पानी के बहाव को नियंत्रित करना और रुके हुए पानी को जमीन को पीने का मतलब है पानी को जमा करके ज़मीन में रिसने देने के लिए ज़रूरी स्ट्रक्चर बनाना। इससे वॉटर मैनेजमेंट के ज़रिए गांव को आत्मनिर्भर बनाने में जन-भागीदारी के मंत्र को लागू करना मुमकिन है। जो गांव पानी का व्यवस्थापन करता है, वह आर्थिक रूप से सक्षम बनता है। हमारे देश में पानी की कमी नहीं है, बल्कि पानी के व्यवस्थापन की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए कुछ सफल प्रयोग किए गए और वे वॉटर कंज़र्वेशन के क्षेत्र में मील के पत्थर बन गए। हमें भी इस काम में सक्रियता से सहभाग लेना चाहिए और आने वाली पीढ़ी के सुनहरे भविष्य में अपना योगदान देना चाहिए।
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