त्याग को लेकर श्रीराम और सीता जी का अंतर्द्वंद्व | रामायण | दिव्य कथाएँ
Jun 10, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration19:44
Video IDoc32iHn7yc8
Languagehi
CategoryFilm & Animation
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Video TypeRegular Video
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राजमहल के विशेष कक्ष में बैठे श्री राम को उनके विश्वस्त गुप्तचर सूचना देते है कि अयोध्या में मधुरा नगरी के बड़े व्यापारी के यहाँ एक बारात आई थी। मधुरा के राजा मधु का विवाह महाराज रावण के कुल में हुआ है और अब उसका पुत्र लवणासुर ही राज करता है। उस बारात में लवणासुर के कुछ गुप्तचर भी आए थे, जो अयोध्या में धूम-धूम कर आपके बारे में जानकारी एकत्र कर रहे थे। श्री राम उसे आदेश देते है कि वह उन पर दृष्टि रखें और जब बारात लौटे तो डोली में कहारों में अपने गुप्तचरों आर्य सुखद और आर्य मधुमद को उनके साथ भेज दे, जिससे मधुरा के राजा के विचारों की जानकारी मिल सके। दूसरा गुप्तचर उन्हें बताता है कि गंगा में बाढ़ आने का कारण प्रजा कर को लेकर चिंतित है तथा कल रात तुरन्त न्याय पाने के लिए पति के द्वारा घर से निकाली हुई स्त्री को प्रहरी ने कल प्रातः आने की बात कह कर राजमहल के द्वार से भगा दिया। अगले दिन श्री राम राज सभा में प्रजा पर कर भार नहीं बढ़ाने की घोषणा करते है और महामंत्री आर्य सुमन्त से कल रात्रि में न्याय माँगने आई हुई स्त्री के वापस जाने पर नाराजगी प्रकट करते हुए कहते है न्याय में देरी न्याय नहीं अन्याय होता है। वह उस महिला को ढूँढने का आदेश देने के पश्चात अपने कक्ष में गुप्तचर को बुलाकर डांटते हुए उस महिला को घर से निकाले जाने का कारण पता लगाने के लिए कहते है। वही दूसरी तरफ महर्षि वाल्मीकि अपने आश्रम में माता सरस्वती की विधिवत पूजा करके रामायण की रचना करना प्रारम्भ करते है।
महाकाव्य रामायण का एक अति महत्वपूर्ण काण्ड है - उत्तर काण्ड अर्थात उत्तर रामायण, रावण के वध के पश्चात श्री राम के सीता सहित अयोध्या वापस आकर राजसिंहासन संभालने की कथा, एक बार पुनः श्री राम सीता के बिछड़ने की कथा, लव-कुश की कथा। श्री राम के राजकीय जीवन और पारिवारिक जीवन के अंतर्द्वंद्व का चित्रण, जिसे रामायण धारावाहिक की सफलता के पश्चात जन भावना को ध्यान में रखते हुए रामानंद सागर जी ने रविन्द्र जैन के मधुर गीत-संगीत से लयवद्ध करा के “उत्तर रामायण” के रूप में प्रस्तुत किया। “तिलक” अपने इस नये संकलन “गीत-संवाद” में उत्तर रामायण के अनेक काव्यबद्ध प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।
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