सूशी का क्रेज़ तो आ गया, पर क्या ये पहलू जानते हैं? [The Sushi Hype] | DW Documentary हिन्दी
May 29, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration42:26
Video IDw7G9s-r9sMo
Languagehi
CategoryNews & Politics
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Video TypeRegular Video
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कभी महंगा और ख़ास भोजन रहा सूशी आज एक ग्लोबल फास्ट-फूड ट्रेंड बन चुका है. चाहे आप इसे किसी एशियन स्नैक बार से लें या सुपरमार्केट के पैक्ड बॉक्स से. सूशी आज बेहद लोकप्रिय है. ये कम कैलोरी वाला, हेल्दी और किफायती भोजन माना जाता है. लेकिन सूशी की बढ़ती खपत कई समस्याएं भी पैदा कर रही है.
ये डॉक्यूमेंट्री सैल्मन और टूना की सप्लाई चेन की एक खोजी पत्रकारिता है, जो सूशी में इस्तेमाल होने वाली दो सबसे अहम सामग्रियां हैं. ये फ़िल्म हमें हिंद महासागर में टूना मछली पकड़ने वाले इलाक़ों से लेकर उत्तरी यूरोप के विशाल सैल्मन फार्मों और साथ ही मछली उद्योग की बड़ी फैक्ट्रियों के सफ़र पर ले जाती है.
जैसे ग्डांस्क के पास हर रोज़ लगभग 1,15,000 सूशी बॉक्स तैयार किए जाते हैं. यानी क़रीब 23 टन रेडीमेड सुशी, जिसका एक हिस्सा जर्मनी के सुपरमार्केट्स तक पहुंचता है.
सूशी में बेहद लोकप्रिय येलोफिन टूना अब विलुप्तप्राय है. इसलिए पर्यावरण संगठन WWF के मत्स्य विशेषज्ञ फ़िलिप कास्टनिंगर सोच-समझकर इस्तेमाल की सलाह देते हैं, क्योंकि ‘वास्तव में सस्टेनेबल येलोफिन टूना लगभग न के बराबर ही है’. आक्रामक फ़िशिंग, फैक्ट्री फार्मिंग और आधुनिक गुलामी जैसी मजदूरी... ये सब सूशी के बढ़ते क्रेज के स्याह पहलू हैं.
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