आनंद का दिन आयेगा आयेगा : दीक्षा कल्याणक भक्ति : ब्र. रवीन्द्र जी 'आत्मन्', अमायन : कुन्दकुन्द वसदि
Dec 10, 2025•Channel
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Published7 months ago
Duration9:34
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Languagehi
CategoryNonprofits & Activism
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🎥🎼 आनंद का दिन आयेगा आयेगा : दीक्षा कल्याणक भक्ति : बाल ब्र. पं. श्री रवीन्द्र जी 'आत्मन्', अमायन : आचार्य श्री कुन्दकुन्द साधना वसदि, शिखर जी पंचकल्याणक
प्रसङ्ग : श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जिनबिम्ब प्राण प्रतिष्ठा समारम्भ, सम्मेदशिखर जी (झारखण्ड़)
स्थान : आचार्य श्री कुन्दकुन्द साधना वसदि, शिखर जी
रचनाकार : श्रद्धेय बाल ब्र. पं. श्री रवीन्द्र जी 'आत्मन्', अमायन (मध्य प्रदेश)
जब तीर्थंकर को वैराग्य आता है, और वे दीक्षा लेने वन कि ओर प्रस्थान करते हैं तब उनकी अंतर परिणति को दर्शाता यह भजन -
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आनन्द का दिन आयेगा आयेगा, निर्ग्रन्थ जीवन आयेगा आयेगा।। टेक।।
स्वरूप निर्ग्रन्थ, श्रद्धा है निर्ग्रन्थ। भाऊँ सहज ही मैं भावना निर्ग्रन्थ।।
निर्ग्रन्थ परिणाम आयेगा2 ।।1।।
अणुमात्र भी मुझको, मेरा न दिखता। ज्ञायक स्वयं में ही परिपूर्ण दिखता।।
प्रचुर स्वसंवेदन आयेगा2 ।।2।।
संयोग के काल में ही हैं न्यारे। संयोग होते कभी न हमारे।।
निरपेक्ष जीवन आयेगा2 ।।3।।
वैभव स्वयं का, स्वयं में ही शाश्वत। प्रभुता स्वयं की स्वयं में ही शाश्वत।।
स्वाधीन जीवन आयेगा2 ।।4।।
बाहर से कुछ भी आता नहीं है। अपना कभी कुछ न जाता कहीं है।।
निश्चिंत जीवन आयेगा2 ।।5।।
स्वभाव से ही ज्ञानमयी हूँ। स्वभाव से ही आनंदमयी हूँ।।
निर्द्वन्द जीवन आयेगा2 ।।6।।
तृप्त स्वयं में, तुष्ट स्वयं में। लीन स्वयं में, मग्न स्वयं में।।
सिद्धों सा जीवन आयेगा2 ।। 7।।
वस्तु स्वरूप सदा है अवस्थित। मार्ग यही है हुई मति व्यवस्थित।।
प्रभुतामय जीवन आयेगा2 ।। 8।।
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मंगल प्रेरणा : बाल ब्र. पं. श्री सुमतप्रकाश जी, खनियाँधाना (मध्य प्रदेश)
स्वर - वंदना पारेख, राजनांदगाँव
रिकॉर्डिंग स्टूडियो :
विलास स्टूडियो राजनांदगाँव
+91 7402193333
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