भाषा, बाजार, पत्रकारिता! हिंदी का भविष्य क्या? Media की गिरती साख पर Achyutanand Mishra के बेबाक बोल

Jun 14, 2026Channel
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Sahitya Tak
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Published6 days ago
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Languagehi
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क्या आज की पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है या अब भी उसमें समाज को दिशा देने की ताकत बची है? क्या हिंदी पत्रकारिता अपनी मौलिकता खोकर केवल अनुवाद पत्रकारिता बनती जा रही है? क्या पत्रकारिता एक मिशन है या आज के समय में पूरी तरह एक व्यवसाय में बदल चुकी है? क्या पत्रकार और सत्ता के बीच की दूरी आज भी उतनी ही जरूरी है जितनी पहले हुआ करती थी? क्या भाषा और पत्रकारिता का रिश्ता सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम है या पहचान और अस्मिता का भी प्रश्न है? क्या आज के संपादकों में वही स्वतंत्रता और गरिमा बची है जो पहले के दौर में देखने को मिलती थी? क्या पत्रकारिता का स्वर्णकाल वास्तव में स्वतंत्रता आंदोलन के समय था या आज भी वैसी प्रतिबद्धता संभव है? क्या युवा पीढ़ी पत्रकारिता को एक करियर के रूप में देखती है या एक जिम्मेदारी के रूप में? क्या संस्थानों की मजबूती से पत्रकारिता मजबूत होती है या व्यक्तित्व की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण होती है? क्या आज का मीडिया समाज को जोड़ रहा है या विभाजित कर रहा है? क्या हिंदी भाषा सिर्फ संचार का माध्यम है या हमारी पहचान? क्या पत्रकारिता में मूल्यों और नैतिकता की वापसी संभव है? क्या बदलते समय में पत्रकारिता का स्वरूप बदलना जरूरी है या उसकी आत्मा को बचाए रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है? इन्हीं और ऐसे ही कई गहरे सवालों पर विस्तार से अपनी बात रखी वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और प्राध्यापक अच्युतानंद मिश्र ने, जो हिंदी पत्रकारिता के उन चुनिंदा स्तंभों में से एक हैं जिन्होंने दशकों तक इस क्षेत्र को दिशा देने का कार्य किया. उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में जन्मे और काशी हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नात्कोत्तर शिक्षा प्राप्त मिश्र ने अपनी पत्रकार यात्रा की शुरुआत जमीनी स्तर से की. आगे चलकर आपने ‘अमर उजाला’, ‘जनसत्ता’ और ‘नवभारत टाइम्स’ जैसे प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में महत्त्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं. आप माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे, जहां आपने नई पीढ़ी के पत्रकारों को दिशा देने का कार्य किया. साहित्य तक स्टूडियो के बातें- मुलाकातें कार्यक्रम में संवाद के दौरान मिश्र ने अपने जीवन के अनुभवों के साथ-साथ हिंदी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, भाषा की चुनौतियों, संपादकीय स्वतंत्रता और पत्रकारिता के मूल्यों पर खुलकर चर्चा की. उन्होंने बताया कि कैसे एक समय पत्रकारिता समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम थी, लेकिन आज उसके सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हैं. सत्ता और मीडिया के रिश्ते, संस्थानों की भूमिका, और पत्रकारिता के व्यवसायीकरण पर उनके विचार इस संवाद को और भी महत्त्वपूर्ण बना देते हैं. यह बातचीत केवल एक वरिष्ठ पत्रकार और संपादक की कर्म और विचार-यात्रा का लेखाजोखा भर नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य को समझने की एक गहरी कोशिश की गई है. इस चर्चा से उन मूल्यों, संघर्षों और सिद्धांतों की झलक मिलती है, जिन्होंने हिंदी पत्रकारिता को आकार दिया और जो आज भी प्रासंगिक हैं. यह संवाद हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि बदलते समय में पत्रकारिता को किस दिशा में जाना चाहिए और उसकी असली जिम्मेदारी क्या है. देखिए और सुनिए हमारे समय के सर्वाधिक सम्मानित और मृदुभाषी संपादकों और पत्रकारों में से एक अच्युतानंद मिश्र के साथ जय प्रकाश पाण्डेय की यह गहन बतकही, सिर्फ साहित्य तक पर. #achyutanandmishra #journalism #hindijournalism #mediadebate #interview #baateinmulakatein #ep116 #jaiprakashpandey #mediaethics #indianmedia #pressfreedom #mediaandsociety #mediaindustry #sahityatak #sahityaaajtak About the Channel Sahitya Tak आपके पास शब्दों की दुनिया की हर धड़कन के साथ I शब्द जब बनता है साहित्य I वाक्य करते हैं सरगोशियां I जब बन जाती हैं किताबें, रच जाती हैं कविताएं, कहानियां, व्यंग्य, निबंध, लेख, किस्से व उपन्यास I Sahitya Tak अपने दर्शकों के लिये लेकर आ रहा साहित्य के क्षेत्र की हर हलचल I सूरदास, कबीर, तुलसी, भारतेंदु, प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी से लेकर आज तक सृजित हर उस शब्द की खबर, हर उस सृजन का लेखा, जिससे बन रहा हमारा साहित्य, गढ़ा जा रहा इतिहास, बन रहा हमारा वर्तमान व समाज I साहित्य, सृजन, शब्द, साहित्यकार व साहित्यिक हलचलों से लबरेज दिलचस्प चैनल Sahitya Tak. तुरंत सब्स्क्राइब करें व सुनें दादी मां के किस्से कहानियां ही नहीं, आज के किस्सागो की कहानियां, कविताएं, शेरो-शायरी, ग़ज़ल, कव्वाली, और भी बहुत कुछ I Sahitya Tak - Welcome to the rich world of Hindi Literature. From books to stories to poetry, essays, novels and more, Sahitya Tak is a melting pot where you will keep abreast of what's the latest in the field of literature. We also delve into our history and culture as we explore literary gems of yesteryears from Surdas, Kabir, Tulsi, Bhartendu, Premchand, Prasad, Nirala, Dinkar, Mahadevi, etc. To know more about how literature shapes our society and reflects our culture subscribe to Sahitya Tak for enriching stories, poems, shayari, ghazals, kawali and much more. Subscribe Sahitya Tak now. ............................ Links: Facebook: https://www.facebook.com/sahityatakofficial Instagram: https://www.instagram.com/sahityatak/ Twitter: https://twitter.com/sahitya_tak

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