माता पुत्र तुम्हारा, नाथ हमारा -जन्मकल्याणक भक्ति | ब्र. रवीन्द्रजी | कुंदकुंद साधना वसदि पंचकल्याणक
Dec 4, 2025•Channel
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Published6 months ago
Duration10:12
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Languagehi
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Description
श्री 1008 पार्श्वनाथ लघु प्राण प्रतिष्ठा समारंभ, सम्मेदशिखरजी मधुवन (झारखंड)
जब सौधर्म इंद्र अपने हाथों से बाल तीर्थंकर को माता के हाथ में सौपते हैं।
माता पुत्र तुम्हारा, नाथ हमारा, भव से तारणहार।
रत्नकुक्षिणी माता धन्य है, जायो जग-आधार ।।1।।
सम्यग्दर्शन से शोभित है, तीन ज्ञान संयुक्त।
अन्तिम देह यही है अब तो, होगा भव से मुक्त ।।2।।
जग में अतिशय पूजित होकर भी होगा निर्ग्रन्थ।
अनन्त चतुष्टय से मण्डित हो, दर्शावे शिवपंथ ।।3।।
दिव्यध्वनि में ध्वनित दिव्य निज शुद्धातम को जान।
भव्य अनेकों प्रतिबोधित हो, बने स्वयं भगवान ।।4।।
माता हम भी प्रभु सम अपना, साधें आत्म-स्वरूप।
अवसर पा निर्ग्रन्थ दशा धरि, ध्यायें शुद्ध चिद्रूप ।।5।।
धन्य-धन्य प्रभु दर्शन पायो, आनंद उर न समाय।
आज ही मानो मोक्ष मिल्यो है, जाननहार जनाय ।।6।।
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रचिता- श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्वर- स्वयं जैन, सीहोर
स्टूडियो - विलास स्टूडियो राजनंदगाँव +91 7402193333