रावण ने किया विभीषण का तिरस्कार | कुम्भकर्ण वध | Ramayan Kunji
Jun 11, 2026•Channel
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Published1 month ago
Duration1:23:03
Video IDzuDgKxRC_6M
Languagehi
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जब श्री राम अपने मित्र सुग्रीव के सेना के साथ समुद्र किनारे पहुँच जाते हैं तो रावण को विभीषण समझता है कि उसे श्री राम से युध नहीं करना चाहिए। रावण ने जो माता सीता का हरण किया है वह राजधर्म के विरुध है और इससे सिर्फ़ लंका का अहित ही होगा और हमें सिर्फ़ विनाश की ओर ही लेकर जाएगा। विभीषण रावण को बहुत से तर्क देकर समझने की कोशिश करता है परंतु रावण नहीं मानता और विभीषण को अपमानित कर देता है और उसे लंका से निकल जाने को कहता है। विभीषण लंका छोड़ कर श्री राम की शरण में चला जाता है।
श्री राम जब माता सीता के साथ वापस अयोध्या लौटे तो उनका राज्यभिषेक करके उन्हें अयोध्या का राजा बना दिया गया। श्री राम ने राजा बनने पर अपने सभी मित्रों को उफ़र दिए और उन्हें धन्यवाद कहा। हनुमान जी को माता सीता ने अपना निजी हार देने की इच्छा ज़ाहिर की तो हनुमान जी को बहुत ठेस लगी। हनुमान जी को लगा को श्री राम और माता सीता ने उन्हें सभी के बराबर समझा है तभी वो मोतियों का हार दे रही है। हनुमान जी माता सीता कहते हैं की, माता अपने मुझे अशोक वाटिका में एक वरदान माँगने के लिए कहा था वो मैं आज माँग लेता हूँ, आप मुझे इस मोतियों की माला की जगह अपनी सेवा करने के वरदान दे दें और मेरे वक्ष स्थान में सदा निवास करें। माता सीता ये सुन प्रसन्न हो जाती है और उन्हें ये वरदान दे देती हैं। हनुमान जी अपना सीना चिर कर सभी को राम सिया के दर्शन कराते हैं और जय श्री राम के जयकार करते हैं।
रामायण कुंजी एक ऐसी श्रीनकल है जो रामायण का सार तथा मार्गदर्शिका जो इसे समझने और इसके गूढ़ अर्थों को जानने में सहायता प्रदान करे।और जटिल बात को सरलता से समजा जा सके
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